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बुश-मनमोहन के बीच अहम बातचीत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश का राष्ट्रपति भवन में औपचारिक रूप से स्वागत हुआ और अब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में उनकी अहम बातचीत शुरू होने रही है. स्वागत के बाद राष्ट्रपति बुश ने कहा,'' यहाँ आकर मैं सम्मानित हूँ. मैं इसके पहले कभी भारत नहीं आया.'' राष्ट्रपति बुश और मनमोहन सिंह की बातचीत के दौरान परमाणु समझौते पर सहमति होने की संभावना जताई जा रही है. हालांकि परमाणु सहयोग के मामले में दोनों देशों के बीच कई असहमतियाँ हैं. इस समझौतों पर सहमति बनाने के लिए भारत और अमरीकी अधिकारियों ने बुधवार देर रात तक बातचीत की. इसमें अमरीकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्टीफ़न हेडले और विदेश उप मंत्री निकोलस बर्न्स और भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन और विदेश सचिव श्याम सरन मौजूद थे. राष्ट्रपति बुश की यात्रा के ठीक पहले भारत ने स्पष्ट किया था कि यह मामला जटिल है और कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर भारत कुछ और स्पष्टीकरण चाहता है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संसद में एक बयान में कहा था कि देश की परमाणु स्वायत्तता को दाँव पर नहीं लगाया जाएगा. बुधवार को राष्ट्रपति बुश दिल्ली पहुँचे तो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने प्रोटोकॉल तोड़ते हुए विमानतल पर उनकी आगवानी की. यह भारतीय उपमहाद्वीप में राष्ट्रपति के रुप में उनकी पहली यात्रा है. उनके साथ उनकी पत्नी लौरा बुश और अमरीका की विदेश मंत्री कोंडालिसा राइस भी आई हैं. व्यस्त कार्यक्रम दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल की बैठक के बाद दोनों नेता व्यक्तिगत चर्चा भी करेंगे. दोपहर बाद दोनों नेता एक संयुक्त पत्रकार वार्ता को संबोधित करेंगे.
दोपहर का भोजन जॉर्ज बुश प्रधानमंत्री के साथ करेंगे और शाम को राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के साथ औपचारिक मुलाक़ात के बाद रात्रिभोज राष्ट्रपति भवन में करेंगे. तीन मार्च को राष्ट्रपति बुश हैदराबाद के लिए रवाना होंगे और वे वहाँ दो कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे. शाम को वे दिल्ली लौटेंगे और शाम को दिल्ली के पुराना किला में भाषण देंगे. चार मार्च की सुबह राष्ट्रपति बुश पाकिस्तान के लिए रवाना हो जाएँगे. |
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