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परमाणु सौदे की प्रशंसा से पटे अख़बार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अधिकांश भारतीय समाचारपत्रों ने भारत और अमरीका के बीच हुई परमाणु सहमति को ऐतिहासिक करार दिया है. अंग्रेज़ी दैनिक हिंदुस्तान टाइम्स ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान की हेडिंग बनाई है-हमने इतिहास रचा. इसी तरह की हेडिंग- हमने आज इतिहास बनाया, इंडियन एक्सप्रेस ने लगाई है. हिंदुस्तान टाइम्स लिखता है कि परमाणु सहमति के मामले में थोड़ी बाधाएँ थीं लेकिन उन्हें पार कर लिया गया है. टाइम्स ऑफ़ इंडिया की सुर्खी है- यह बडा़ समझौता है, बहुत बड़ा. अख़बार लिखता है कि अभी अभियान कामयाब नहीं हुआ है. राष्ट्रपति बुश को अमरीकी संसद से इस पर सहमति लेनी होगी. दैनिक हिंदुस्तान का शीर्षक है- भारत और अमरीका ने लिखी नई तारीख. अख़बार के अनुसार भारत और अमरीका के बीच परमाणु मसले पर ऐतिहासिक सहमति कायम हुई है. अख़बार ने राष्ट्रपति बुश के बयान को प्रमुखता से छापा है कि वे परमाणु समझौते पर कांग्रेस को मना लेंगे. राष्ट्रीय सहारा ने शीर्षक लगाया है- भारत-अमरीका संबंध नए शिखर पर. अख़बार लिखता है कि सिर्फ़ पाँच मुलाक़ातों में बेबाकी का ये आलम, भई वाह. नवभारत टाइम्स की हेडिंग है- बात बन ही गई. अख़बार कहता है कि इस सहमति से भारत विकसित देशों के परमाणु क्लब से जुड़ सकेगा. पंजाब केसरी की सुर्खी है- परमाणु समझौते पर मोहर, मतभेद दूर. अख़बार के अनुसार राष्ट्रपति बुश ने अमरीकी कांग्रेस से हरी झंडी लेने का आश्वासन दिया है. अमर उजाला ने सहमति पर सवाल उठाए हैं. उसका शीर्षक है- एटमी सुकून की कीमत पर स्वाभिमान से समझौता. अख़बार का कहना है कि भारत ने अमरीका के साथ ऐतिहासिक करार पर राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से अपनी कई शर्तें ज़रूर मनवा लीं. लेकिन इस एटमी सुकून के लिए अपने राष्ट्रीय स्वाभिमान के साथ भी कई समझौते करने पड़े हैं. |
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