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बुधवार, 01 मार्च, 2006 को 16:54 GMT तक के समाचार
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'पहली बार अच्छा माहौल बना है'

बुश-मनमोहन
राजामोहन मानते हैं कि माहौल बेहतर है
राष्ट्रपति जॉर्ज बुश भारत और पाकिस्तान की यात्रा पर आ रहे हैं तो दोनों देशों के बीच पिछले 60 वर्षों में पहली बार अच्छा संबंध बना है, ऐसा हमें मानना चाहिए.

बात सिर्फ़ परमाणु संबंधों की नहीं है, यह परमाणु मसला तो पिछला 40 वर्ष पुराना विवाद रहा है भारत और अमरीका के बीच. इसे ख़त्म करना और एक नया सामरिक रिश्ता बनाना एजेंडा है.

अमरीका की सोच है कि इस बार विवाद हटा देंगे. एक राजनीतिक-सामरिक-रणनीतिक संबंध, जो भारत और अमरीका में पहले कभी नहीं हुआ, इसकी स्थापना अब कर सकते हैं.

प्रतिस्पर्धा

दुनिया में यह नहीं कह सकते कि किसकी किसे ज़्यादा ज़रूरत है.

हम चीन के साथ प्रतिस्पर्धा में हैं पर वह अमरीका से अनुमति लेकर तो नहीं किया हमने.

 इससे पहले पिछले 60 वर्षों में भारत और अमरीका का संबंध इतना मज़बूत कभी नहीं थे. वैसे ही भारत और चीन के संबंध भी कभी इतने मजबूत नहीं थे

बर्मा में उनके साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं. दक्षिण-पूर्वी एशिया में पिछले 10 वर्षों से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, ऐसा हम अमरीका से अनुमति लेकर तो नहीं कर रहे हैं.

दो बड़े देश हों और पड़ोसी भी हों तो उनका अपने-आप एक परस्पर प्रतियोगी कार्यप्रणाली होती है. इसका ये मतलब नहीं कि वह हमारा सहयोगी नहीं होगा.

इससे पहले पिछले 60 वर्षों में भारत और अमरीका का संबंध इतना मज़बूत कभी नहीं थे. वैसे ही भारत और चीन के संबंध भी कभी इतने मजबूत नहीं थे.

चीन अगले तीन साल में हमारा सबसे बड़ा व्यापारिक मित्र बनने वाला है. अमरीका प्रमुख मित्र तो है ही.

नए समीकरण

चीन को अलग करके बाकी उनके ख़िलाफ़ लामबंद हो रहे हैं. ऐसा प्रयास नहीं है कि शक्ति संतुलन स्थापित हो.

शायद 19 वीं शताब्दी के यूरोप जैसा जहाँ चार-पाँच बड़े देश होते हैं. सब एक दूसरे के साथ खेलते रहते हैं लेकिन ये किसी के ख़िलाफ़ नहीं हैं.

परमाणु सहमति पर एक-दो मुद्दों पर ही मतभेद बचे हैं जो बुधवार शाम तक निपट जाएंगे. उम्मीद बढ़ती जा रही है.

परमाणु समझौते पर जो तैयारी थी उसपर समझौता शायद गुरुवार तक हो जाएगा और यही सबसे अहम मुद्दा है.

दूसरी भी बहुत सारी चीज़ें हैं. ऊर्जा और आर्थिक मुद्दों पर एक रिपोर्ट आ रही है. दोनों देशों के बड़े उद्योगपतियों ने मिलकर एक रिपोर्ट बनाई है, उसे भी रखा जाएगा.

(सीमा चिश्ती से बातचीत पर आधारित)

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