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बुश दिल्ली पहुँचे, मनमोहन ने की आगवानी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश तीन दिन के भारत दौरे पर दिल्ली पहुँच गए हैं. यह भारतीय उपमहाद्वीप में राष्ट्रपति के रुप में उनकी पहली यात्रा है. उनके साथ उनकी पत्नी लौरा बुश और अमरीका की विदेश मंत्री कोंडालिसा राइस भी आई हैं. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने प्रोटोकॉल तोड़ते हुए विमानतल पर उनकी आगवानी की है. राष्ट्रपति बुश की इस यात्रा के दौरान भारत के साथ परमाणु मामले पर समझौते होने की संभावना जताई जा रही है. हालांकि परमाणु सहयोग के मामले में दोनों देशों के बीच कई असहमतियाँ हैं. राष्ट्रपति बुश की यात्रा के ठीक पहले भारत ने स्पष्ट किया था कि यह मामला जटिल है और कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर भारत कुछ और स्पष्टीकरण चाहता है. इसके पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की इस माँग को नामंज़ूर कर दिया था कि भारत अपने देसी फ़ास्ट ब्रीडर परमाणु कार्यक्रम पर कुछ रोक लगाए. संसद में एक बयान में प्रधानमंत्री ने कहा था कि देश की परमाणु स्वायत्तता को दाँव पर नहीं लगाया जाएगा. अहम यात्रा जॉर्ज बुश की इस तीन दिनों की यात्रा में गुरुवार, दो मार्च का दिन महत्वपूर्ण होगा जब वे भारत के प्रधानमंत्री के साथ हैदराबाद हाउस एक बैठक करेंगे. दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल की बैठक के बाद दोनों नेता व्यक्तिगत चर्चा भी करेंगे. दोपहर बाद दोनों नेता एक संयुक्त पत्रकार वार्ता को संबोधित करेंगे. माना जा रहा है कि इसी में परमाणु सहयोग पर महत्वपूर्ण घोषणा हो सकती है. दोपहर का भोजन जॉर्ज बुश प्रधानमंत्री के साथ करेंगे और शाम को राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के साथ औपचारिक मुलाक़ात के बाद रात्रिभोज राष्ट्रपति भवन में करेंगे. दो मार्च को दिन की शुरुआत बुश राजघाट में महात्मा गाँधी की समाधि पर फूल चढ़ाकर करेंगे. हैदराबाद का दौरा तीन मार्च को राष्ट्रपति बुश हैदराबाद के लिए रवाना होंगे और वे वहाँ दो कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे. शाम को वे दिल्ली लौटेंगे और शाम को दिल्ली के पुराना किला में भाषण देंगे. चार मार्च की सुबह राष्ट्रपति बुश अपने प्रतिनिधि मंडल के साथ पाकिस्तान के लिए रवाना हो जाएँगे. |
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