|
प्रवासी भारतीय सम्मेलन में विवाद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चौथे प्रवासी भारतीय दिवस का अंत नारेबाज़ी और गिरफ़्तारी से हुआ. विश्व हिंदू परिषद से जुड़े डॉक्टर सुधीर पारेख को राष्ट्रपति अब्दुल कलाम को सम्मानित किए जाने का कुछ लोगों ने विरोध किया और समारोह स्थल पर नारेबाज़ी की. बाद में सरकारी कार्यक्रम में बाधा डालने के आरोप में तीन लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया. प्रवासी भारतीयों को सम्मानित करने का कार्यक्रम पूर्व निर्धारित तरह से चल रहा था. सम्मान पानेवालों में सातवाँ नंबर सर गुलाम नून का था. उनके नाम पर जमकर तालियाँ बजीं. फिर आठवें नंबर पर डॉक्टर सुधीर पारेख के नाम की घोषणा हुई. वे ज्यों ही मंच पर राष्ट्रपति से सम्मान हासिल करने आए, आगे की पंक्ति में बैठे प्रोफेसर सत्यनाथ चौधरी उठ खड़े हुए और उन्होंने इसका विरोध करते हुए शेम-शेम के नारे लगाए. इसके बाद अमरीका के कोलीशन अगेस्ट जेनोसाइड के अताउल्ला खां भी उठ खड़े हुए और उन्होंने भी इसका विरोध. 'आरोप'
सतनाथ चौधरी का कहना था कि सुधीर पारिख गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े रहे हैं और और मोदी गुजरात में हुए दंगों के लिए दोषी हैं. अताउल्ला ख़ान ने कहा कि डॉक्टर पारिख को सम्मानित किए जाने का हम विरोध करते हैं. हैदराबाद के डीसीपी-क़ानून व्यवस्था एमके सिंह ने बताया कि तीन लोगों को सरकारी कार्यक्रम में बाधा डालने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है. लेकिन इसके बाद मोदी समर्थक प्रवासी भारतीय भी मैदान में आ गए. अमरीका में भारतीय एसोसिएशन से जुड़े रहे भरत बराय और इफ़्तिकार शरीफ़ का कहना था कि डॉक्टर पारेख का इस तरह से विरोध किया जाना उचित नहीं है. वे एक सम्मानित व्यक्ति है. हम इस विरोध को उचित नहीं मानते हैं. डॉक्टर पारेख पेशे से डॉक्टर हैं और वो अमरीकी भारतीय समाज के अध्यक्ष रहे हैं. सम्मान राष्ट्रपति ने 15 लोगों को सम्मानित किया है जिसमें से 11 लोग उपस्थित थे. इसमें फ़्रांस के सीनेटर जाँ पाल विरेपां, न्यूज़वीक इंटरनेशनल के संपादक फरीद ज़कारिया और लंदन के नून प्रोडक्टस के चेयरमैन ग़ुलाम नून, गुयाना के प्रमुख उद्योगपति येसु प्रसाद, दक्षिण अफ़्रीका के सिसुपाल रामभरोस, क़तर के प्रमुख उद्योगपति सीके मेनन, मॉरिशस के प्रमुख नेता अब्दुल रऊफ़ बुंधन शामिल हैं. इनके अलावा सूची में शिवनाथ बजाज, प्रतिमा काले, रूसी श्रोफ, वी रामदॉस, निरंजन शाह, माजिदउद्दीन काज़ी, इसराइल के कृषि वैज्ञानिक एलियाहू बेज़ले शामिल हैं. राष्ट्रपति कलाम ने अपने भाषण में प्रवासी भारतीयों से भारत के गाँवों के बदलाव में भूमिका निभाने का आह्ववान किया. राष्ट्रपति ने कहा कि आप अपने गाँव के आसपास के क्षेत्र को अपनाएं और अनुभव और जानकारी की मदद से इनमें बदलाव लाएँ. |
इससे जुड़ी ख़बरें | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||