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प्रवासी भारतीयों को स्मार्ट कार्ड मिलेगा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत सरकार ने घोषणा की है कि तीन महीने के अंदर प्रवासी भारतीयों को स्मार्ट कार्ड जारी किया जाएगा जिसमें उनके बारे में सारी जानकारियाँ होंगी. दूसरी ओर प्रवासी भारतीय दिवस के दौरान खाड़ी के देशों में रह रहे लोगों की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की गई. इस सत्र में हिस्सा ले रहे प्रवासी भारतीयों ने सरकार के क़दमों को अपर्याप्त बताया और माँग की कि खाड़ी देशों के लिए ओपन स्काई की नीति अपनाई जाए, फेरी सेवा शुरू हो और केरल और आंध्र प्रदेश की तरह सभी राज्यों में इसके संबंध में अलग मंत्रालय बनाए जाएँ. कई प्रवासी भारत सरकार के 'ढीले-ढाले' रवैये से नाख़ुश थे और उनका कहना था कि सरकार की ओर से घोषणाएँ तो होती हैं लेकिन उन पर अमल नहीं होता. इस सत्र में उभरकर आया कि खाड़ी के देशों में काम करने वाले लोगों का अनेक स्तरों पर शोषण होता है. स्मार्ट कार्ड सरकार की ओर से घोषणा की गई कि तीन महीने के अंदर प्रवासी भारतीयों को स्मार्ट कार्ड जारी करने की योजना शुरू हो जाएगी. इस कार्ड में उस व्यक्ति के बारे में सारी जानकारी उपलब्ध होगी.
भारत सरकार के प्रवासी भारतीय मंत्रालय के प्रोटेक्टर जनरल ऑफ़ इमीग्रेंटस आरके सिंह ने बताया कि विदेशों में दो करोड़ भारतीय या तो बसे हुए हैं या काम करने गए हुए हैं. इन भारतीयों ने 2004-05 के दौरान 20.5 अरब डॉलर की रक़म भेजी है. सरकारी क़दमों की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि इनके लिए प्रवासी भारतीय बीमा योजना 2006 की शुरुआत की गई है. इसमें बीमा की राशि दो लाख से बढ़कर पाँच लाख हो जाएगी. इसके अलावा स्मार्ट कार्ड की शुरू करने की योजना है और खाड़ी के 13 भारतीय दूतावासों में 24 घंटे चलने वाली सहायता टेलीफ़ोन सेवा की शुरूआत की योजना है. साथ ही प्रवासी कामगार कल्याण कोष भी स्थापित करने पर विचार चल रहा है. मुश्किलें दुबई में भारतीय समुदाय कल्याण समिति के समन्वयक कृष्णामूर्ति कुमार का कहना था कि खाड़ी के देशों में जाने वाले अनेक लोगों को एजेंट ठगते हैं. ऐसे अनेक मामले हैं जिनमें मज़दूरों को तय वेतन नहीं मिलता, रहने के लिए घटिया जगह दी जाती है, पासपोर्ट ज़ब्त कर लिया जाता है, महिला कर्मचारियों का शारीरिक शोषण किया जाता है और पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएँ नहीं दी जातीं. उनका कहना था कि यही वजह ही कि इन देशों में प्रवासी भारतीयों के मौत और आत्महत्या के अनेक मामले सामने आए हैं. प्रवासी भारतीयों ने मौत की स्थिति में दाह संस्कार में होने वाली कठिनाइयों को भी उठाया गया. सऊदी अरब के मोहम्मद सईउद्दीन ने वहाँ हिंदुओं के दाह संस्कार में आने वाली कठिनाइयों को सऊदी शाह की भारत यात्रा के दौरान उठाने का सुझाव दिया. खाड़ी के प्रवासी भारतीयों का कहना था कि उनकी और पश्चिमी देशों में रह रहे लोगों की समस्याएँ एकदम भिन्न हैं और दोनों को मिला कर नहीं देखा जाना चाहिए. आंध्र प्रदेश के मंत्री मोहम्मद अली शबर ने साफ़ शब्दों में कहा कि भारत सरकार की प्रवासी भारतीयों की परेशानियों को दूर करने में बिल्कुल प्रभावी नहीं और नीतियाँ काफ़ी पीछे हैं. दुबई की इंडियन बिज़नेस और प्रोफेशनल काउंसिल के सुरेश कुमार का सुझाव था कि हर साल भारत में प्रवासी भारतीय सम्मेलन आयोजित करने के बजाय इसे अगली बार दुबई में आयोजित किया जाना चाहिए. | इससे जुड़ी ख़बरें | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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