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तत्काल बातचीत के लिए तैयार: राजपक्षे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका के नए राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने कहा है कि वे तमिल विद्रोहियों के संगठन एलटीटीई के साथ तत्काल शांति वार्ता शुरु करने के लिए तैयार हैं. महत्वपूर्ण है कि एलटीटीई ने रविवार को सरकार को चेतावनी दी थी कि यदि विवाद का राजनीतिक हल जल्द न निकाला गया तो अगले साल संघर्ष तेज़ कर दिया जाएगा. अपने वार्षिक नीतिगत बयान में एलटीटीई प्रमुख प्रभाकरन ने संयम का बाँध टूट जाने की बात करते हुए कहा था, "यह हमारी आख़िरी अपील है. यदि जल्द हल नहीं निकाला गया तो हम स्वशासन के लिए संघर्ष तेज़ करेंगे." राष्ट्रपति राजपक्षे ने कहा कि वे तत्काल बातचीत के लिए तैयार हैं ताकि कम से कम वर्ष 2002 के संघर्षविराम की समीक्षा की जा सके. नॉर्वे की मध्यस्थता से वर्ष 2002 में हुए संघर्षविराम से श्रीलंका में बीस साल से चला आ रहा गृह युद्ध बंद हुआ था जिसमें 60 हज़ार लोग मारे गए. राजपक्षे इस महीने राष्ट्रपति चुने गए थे और उन्होंने चुनाव प्रचार में विद्रोहियों के ख़िलाफ़ कड़ा रुख़ अपनाने की बात कही थी. राजपक्षे ने तत्काल शांति वार्ता शुरु करने की बात तो की है लेकिन एलटीटीई की समयसीमा में विवाद के हल के बारे में कोई आश्वासन नहीं दिया है. महत्वपूर्ण है कि जहाँ राष्ट्रपति एक ही देश में रहते हुए इस विवाद के हल की बात कर रहे हैं वहीं तमिल विद्रोही देश के उत्तर और पूर्व में स्वाशासन की बात करते आए हैं. पर्यवेक्षकों का कहना है कि फ़िलहाल ये समझना मुश्किल है कि सरकार और तमिल विद्रोहियों के नज़रिए को देखते हुए बीच का रास्ता क्या हो सकता है. | इससे जुड़ी ख़बरें श्रीलंका राष्ट्रपति चुनाव में राजपक्षे जीते17 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस राजपक्षे:अभिनय से राजनीति तक18 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में गुरूवार को राष्ट्रपति चुनाव16 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'एलटीटीई ने समझौते का उल्लघंन किया'10 मार्च, 2005 | भारत और पड़ोस श्रीलंका की समस्या और भारत का भविष्य04 फ़रवरी, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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