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श्रीलंका राष्ट्रपति चुनाव में राजपक्षे जीते | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका से प्राप्त ताज़ा जानकारी के अनुसार राष्ट्रपति चुनाव में प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने विपक्षी नेता रनिल विक्रमसिंघे को बहुत कम अंतर से हरा दिया है. अंतिम परिणामों के अनुसार श्रीलंका फ़्रीडम पार्टी के नेता और वर्तमान प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे को 50 प्रतिशत से थोड़े अधिक मत मिले हैं. उन्हें चार करोड़, 88 लाख, 80 हज़ार मत मिले. यूनाईटेड नेशनल पार्टी के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे उनसे एक लाख 80 हज़ार मतों से पीछे रह गए. चुनाव में वैसे तो 13 उम्मीदवार भाग्य आज़मा रहे थे लेकिन असल टक्कर इन्हीं दोनों उम्मीदवारों के बीच थी. राष्ट्रपति चुनाव को देश के भविष्य के लिए अहम माना जा रहा था. पिछले चार साल में श्रीलंका में राष्ट्रीय स्तर पर ये छठे चुनाव हैं. श्रीलंका में राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा का कार्यकाल इस वर्ष समाप्त हो रहा है. वे दो बार देश की राष्ट्रपति रही हैं. पहली बार वे 1994 में इस पद पर आईं थीं. इस बीच श्रीलंका पुलिस ने बताया है कि पूर्वी श्रीलंका में अक्कराइपट्टू शहर में एक मस्जिद में हथगोले फेंके गए हैं जिससे चार लोगों की मौत हो गई है. मतदान
श्रीलंका में गुरूवार को राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान हुआ जिसमें लगभग 75 फ़ीसदी लोगों ने मत डाले. लेकिन तमिल बहुल इलाक़ों में प्रतिशत काफ़ी कम रहा. तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई के प्रभाव वाले अल्पसंख्यक तमिल समुदाय के ज़्यादातर लोगों ने चुनाव का बहिष्कार किया. चुनावों की निगरानी कर रहे एक संगठन 'द पीपुल्स ऐक्शन फॉर फ़्री एंड फ़ेयर इलेक्शन' ने कहा कि तमिल विद्रोहियों के बहिष्कार के आह्वान के चलते जाफ़ना इलाक़े में सिर्फ़ 0.014 प्रतिशत मतदान हुआ. बीबीसी की कोलंबो संवाददाता दुमिता लूथरा के अनुसार तमिल विद्रोही खुले रुप से तो मतदाता को रोकते हुए दिखाई नहीं पड़े लेकिन चुनाव पर्यवेक्षकों का कहना है कि विद्रोहियों ने मतदाताओं को वोट देने से रोक दिया गया. बीबीसी संवाददाता का कहना था कि तमिलों के मतदान से दूर रहने से विपक्षी दल यूनाईटेड नेशनल पार्टी के उम्मीदवार रनिल विक्रमसिंघे को नुक़सान होगा. मुद्दे इन चुनावों के लिए लोगों के सामने दो बड़े मुद्दे थे. एक तो बढ़ती हुई महंगाई और दूसरा शांति प्रक्रिया. दोनों प्रमुख उम्मीदवारों की शांति प्रक्रिया और आर्थिक मामलों पर राय बिल्कुल अलग-अलग है. विक्रमसिंघे 2002 में देश के प्रधानमंत्री थे जब श्रीलंका सरकार और तमिल विद्रोहियों के बीच युद्धविराम पर सहमति हुई थी. | इससे जुड़ी ख़बरें 'कुमारतुंगा का कार्यकाल दिसंबर तक'26 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस राष्ट्रपति के भाई बने विदेश मंत्री22 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस नॉर्वे में बातचीत से इनकार25 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में आपातकाल की अवधि बढ़ी18 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस विदेश मंत्री की हत्या के बाद श्रीलंका में आपातकाल13 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में सत्तारूढ़ गठबंधन में फूट15 जून, 2005 | भारत और पड़ोस क्या है श्रीलंका का तमिल संकट02 मई, 2004 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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