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श्रीलंका में सत्तारूढ़ गठबंधन में फूट | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सूनामी पीड़ितों की सहायता में तमिल विद्रोहियों एलटीटीई का सहयोग लिए जाने का विरोध करते हुए श्रीलंका के सत्तारुढ़ गठबंधन का एक प्रमुख दल अलग हो गया है. इस योजना को रोकने के लिए सरकार को दिया हुआ समय समाप्त हो जाने के बाद सिंहला नेशनलिस्ट लिबरेशन फ्रंट (जेवीपी) ने गठबंधन छोड़ दिया है. विश्लेषकों का कहना है कि हालांकि इसके बाद भी गठबंधन सरकार चलती रहेगी, हालांकि सरकार पर अल्पसंख्यक होने का ख़तरा मंडराता रहेगा. जेवीपी को आशंका है कि इस तरह के सहायता कार्यक्रम से आख़िरकार तमिल विद्रोहियों को अगल तमिल राज्य की स्थापना की योजना में सहायता मिलेगी. 225 सदस्यों वाली संसद में जेवीपी के 39 सदस्य हैं और उनके समर्थन वापसी से राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा की सरकार के बहुमत पर सीधा असर पड़ेगा. बीबीसी की श्रीलंका संवाददाता दुमिता लूथरा का कहना है कि सूनामी पीड़ितों की सहायता के लिए मिली दो अरब डॉलर की राशि के वितरण के लिए अपनी राजनीतिक साख को दाँव पर लगा रखा है. सूनामी पीड़ितों के लिए अंतराराष्ट्रीय दानदाता देशों में भी बड़ी राशि दी है. हालांकि पिछले कुछ दिनों में इसे लेकर जिस तरह के हिंसक प्रदर्शन हुए हैं उसने रेखांकित किया है कि यह कोई लोकप्रिय योजना नहीं है. उल्लेखनीय है सूनामी में श्रीलंका में 31 हज़ार लोग मारे गए थे और लगभग पाँच लाख लोग बेघर हो गए थे. |
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