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चंद्रिका कुमारतुंग दिल्ली दौरे पर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका की राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंग गुरूवार सुबह दो दिन की यात्रा पर दिल्ली पहुंचीं और शुक्रवार को वह भारतीय नेताओं के साथ कई द्विपक्षीय मसलों पर बात करने वाली हैं. इन मुद्दों में श्रीलंका की शांति प्रक्रिया और द्वीप के उत्तर और पूर्वी भाग में सूनामी पीड़ितों की सहायता के लिए दी जाने वाली राशि को एलटीटीई के साथ बाँटने का मुद्दा भी शामिल है. कुमारतुंग भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलेंगी. इसके अलावा वे कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी समेत कई शीर्ष नेताओं से मिलेंगीं. शांतिवार्ता चंद्रिका कुमारतुंग की यात्रा के दौरान जिस विषय पर चर्चा निश्चित है वह है श्रीलंका सरकार और एलटीटीई के बीच शांति वार्ता की स्थिति. तमिल विद्रोहियों को लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक हफ़्ते पहले जो बयान दिया था वह इस मसले पर भारत की रुचि को रेखांकित करता है. मनमोहन सिंह ने कहा था कि श्रीलंका की एकता और अखंडता में भारत की रुचि है और भारत चाहता है कि श्रीलंका की जातीय समस्या का शांतिपूर्ण हल निकले. भारत इन ख़बरों को लेकर चिंतित है कि एलटीटीई को दो लड़ाकू विमान मिल गए हैं और अब वह वायुसेना खड़ी करनी की तैयारी में है. सूनामी राहत चंद्रिका कुमारतुंग की यात्रा के दौरान सूनामी राहत के मसले पर भी चर्चा होने की संभावना है. श्रीलंका सूनामी पीड़ितों को राहत पहुँचाने के कार्यक्रम में द्वीप के उत्तरी और उत्तर पूर्वी भागों में एलटीटीई की सहायता लेना चाहता है. हालाँकि श्रीलंका में सत्ताधारी गठबंधन में शामिल कुछ दल इसके ख़िलाफ़ हैं कि राहत पहुँचाने में एलटीटीई को साथ लिया जाए. लेकिन चंद्रिका कुमारतुंग का मत है कि उन इलाक़ों में जहाँ एलटीटीई का प्रभावशाली नियंत्रण है वहाँ उनकी सहायता लेनी चाहिए. भारत में इस मसले पर भी दो तरह का मत है कि इस मामले को पूरी तरह से श्रीलंका पर छोड़ देना चाहिए या फिर सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए. |
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