| विदेश मंत्री की हत्या के बाद श्रीलंका में आपातकाल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका में विदेश मंत्री लक्ष्मण कादिरगामर की हत्या के बाद आपातकाल लागू कर दिया गया है. कादिरगामर की शुक्रवार रात कोलंबो में गोली मार कर हत्या कर दी गई. इसके कुछ घंटों बाद श्रीलंका की राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा ने देश में आपातकाल लागू कर दिया. राष्ट्रपति कुमारतुंगा के प्रवक्ता ने कहा कि देश की सुरक्षा को ध्यान में रखकर आपातकाल लगाने का फ़ैसला किया गया. उन्हें सिर और सीने में गोलियाँ लगीं. उन्हें तत्काल गंभीर हालत में कोलंबो के नेशनल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया. डॉक्टरों ने तुरंत उनके सिर का ऑपरेशन किया लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका. पुलिस के अनुसार संभवतः एक या दो हमलावरों ने भारी सुरक्षा व्यवस्था वाले उनके आवास के पास उन्हें गोलियाँ मारी. अभी तक ये पता नहीं चल सका है कि इस हत्या के पीछे किसका हाथ है पुलिस को तमिल विद्रोहियों पर संदेह है. हमलावर की तलाश में पुलिस ने कोलंबो में एक बड़ा अभियान शुरू किया है. छह संदिग्ध लोगों से पूछताछ भी की जा रही है. विद्रोहियों का विरोध
73 वर्षीय कदिरगामर का स्थान श्रीलंका की राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण था और वे राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा के बेहद नज़दीकी माने जाते थे. राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा ने कादिरगामर को पिछले साल अप्रैल में प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे की सरकार में विदेश मंत्री नियुक्त किया था. इसके पहले वे चंद्रिका कुमारतुंगा के शासनकाल में 1994 से 2001 तक भी विदेश मंत्री रहे थे. कादिरगामर स्वयं तमिल मूल के थे, लेकिन वह तमिल छापामारों से बातचीत के सरकारी प्रयासों का विरोध करते रहे थे. कादिरगामर ने ब्रिटेन और अमरीका में एलटीटीई को प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन घोषित करवाने में प्रमुख भूमिका निभाई थी. समाचार एजेंसियों के अनुसार उन्होंने पिछले दिनों कहा था कि वह तमिल छापामारों के निशाने पर हैं. श्रीलंका में सरकार और तमिल छापामारों के बीच 2002 से ही युद्धविराम लागू है. हालाँकि हाल के दिनों में दोनों पक्षों में मतभेद उभरने के संकेत दिखते रहे हैं. लक्ष्मण कदिरगामर की हत्या को श्रीलंका में सेना और विद्रोहियों के बीच संघर्षविराम की निगरानी करनेवाले आयोग के अध्यक्ष ने संघर्षविराम का उल्लंघन बताया है. उन्होंने कहा है कि इस हत्या का श्रीलंका की नाज़ुक शांति प्रक्रिया पर बहुत गंभीर असर पड़ेगा. |
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