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नॉर्वे में बातचीत से इनकार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका की सरकार ने तमिल विद्रोहियों के आग्रह को ठुकरा दिया है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत नॉर्वे में आयोजित की जाए. एक सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि संघर्ष विराम को कार्यान्वित कराने के लिए कोई भी बातचीत श्रीलंका में ही होनी चाहिए. विदेश मंत्री लक्ष्मण कादिरगामर की हत्या के बाद पिछले सप्ताह लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम(एलटीटीई) छापामारों ने सरकार के साथ बातचीत में भाग लेने की सहमति व्यक्त की थी. सरकार ने हत्या के लिए एलटीटीई को दोषी बताया था, जबकि तमिल विद्रोहियों ने इस आरोप से साफ इनक़ार किया था. नॉर्वे में बातचीत की संभावनाओं को नकारते हुए श्रीलंका सरकार के प्रवक्ता निमल श्रीपाल डी सिल्वा ने कहा, "चूँकि बातचीत संघर्ष विराम के उल्लंघन और शांति को आधार देने के बारे में होने वाली है, इसलिए यह श्रीलंका में ही होनी चाहिए." उन्होंने कहा, "सरकार का रुख़ है कि बातचीत देश में ही आयोजित करना ज़्यादा व्यावहारिक होगा." कहाँ हो बातचीत विश्लेषकों के अनुसार सरकार को भय है कि विदेश में बातचीत आयोजित करने से तमिल विद्रोहियों का कद बढ़ेगा. सरकार के सुझाव पर अभी एलटीटीई की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. कोलंबो से बीबीसी संवाददाता दुमीता लूथरा के अनुसार श्रीलंका में बातचीत कहाँ आयोजित हो, इस बात पर दोनों पक्षों में सहमति बनाना भी आसान नहीं होगा. कोलंबो मे राजनयिकों के अनुसार देश के उत्तर में एलटीटीई और सरकार नियंत्रित इलाक़ों के बीच की किसी जगह पर ही सहमति बन सकती है. |
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