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तमिल विद्रोही बातचीत पर राज़ी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों ने सरकार के साथ सीधी बातचीत में शामिल होने का फ़ैसला किया है. विद्रोहियों का यह फ़ैसला विदेश मंत्री लक्ष्मण कादिरगामर की हत्या की घटना के सप्ताह भर के भीतर सामने आया है. प्रस्तावित बातचीत दोनों पक्षों के बीच 2003 के बाद पहली सीधी बातचीत होगी. अभी बातचीत की तिथि और स्थान के बारे में फ़ैसला किया जाना बाकी है. नॉर्वे के मध्यस्थों ने इसे शांति प्रक्रिया में एक अहम क़दम बताया है. नॉर्वे के विदेश उपमंत्री वाइडर हेल्गेसन ने कहा हैकि तमिल विद्रोही सरकार के साथ संघर्ष विराम को लागू करने के मुद्दे पर बातचीत करने को सहमत हुए हैं. दबाव कादिरगामर की उनके कोलंबो स्थित आवास के पास हुई हत्या को शांति प्रक्रिया को एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है. इस हत्याकांड के बाद सरकार ने पूरे देश में आपातकाल की घोषणा कर दी, ताकि हर जगह सेना की तैनाती की जा सके. सरकार ने कादिरगामर की हत्या में तमिल विद्रोहियों का हाथ होने की आशंका से इनकार नहीं किया. हालाँकि विद्रोहियों ने आरोप से इनकार किया. कोलंबो से बीबीसी संवाददाता दुमीता लूथरा के अनुसार श्रीलंका में शांति बनाए रखने को लेकर विद्रोहियों पर दबाव बढ़ गया है. कादिरगामर की हत्या से पहले तमिल विद्रोही बातचीत में भाग लेने से यह कहते हुए इनकार कर रहे थे कि पहले सरकार तमिल बहुल इलाक़ों में सरकार नियंत्रित क्षेत्रों से अर्द्धसैनिक बलों को वापस बुलाए. |
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