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'एलटीटीई के साथ संघर्षविराम जारी रहेगा' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका में राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंग के एक प्रवक्ता ने कहा है कि विदेश मंत्री लक्ष्मण कदिरगामर की हत्या के बाद पैदा हुई नयी स्थिति के बावजूद एलटीटीई के साथ संघर्ष विराम जारी रहेगा. हालाँकि सरकार विदेश मंत्री लक्ष्मण कदिरगामर की हत्या के पीछे एलटीटीई को ही ज़िम्मेदार मानती है. बीबीसी के साथ बातचीत में राष्ट्रपति कुमारतुंग के प्रवक्ता हारिम पेईरिस ने माना कि विदेश मंत्री की हत्या शांति प्रक्रिया के लिए बड़ा झटका है लेकिन संघर्ष विराम अभी भी क़ायम है. शुक्रवार रात को विदेश मंत्री लक्ष्मण कदिरगामर की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी. इसके बाद से ही शांति प्रक्रिया और संघर्ष विराम पर सवाल उठाए जा रहे हैं. विदेश मंत्री की हत्या को लेकर सरकार और एलटीटीई के बीच बयानबाज़ी भी चल रही है. आरोप-प्रत्यारोप सरकार ने आरोप लगाया है कि विदेश मंत्री कदिरगामर की हत्या के पीछे एलटीटीई का ही हाथ है. लेकिन एलटीटीई इससे इनकार करता है.
श्रीलंका की सरकार ने एलीटीटीई के उस बयान को ख़ारिज कर दिया है जिसमें संगठन ने कदिरगामर की हत्या में अपना हाथ होने से इनकार किया है. एक सरकारी प्रवक्ता श्रीपाल डि सिल्वा ने बताया कि अधिकारियों का मानना है कि एलटीटीई का बयान स्वीकार नहीं किया जा सकता. विदेश मंत्री लक्ष्मण कदिरगामर ख़ुद तमिल थे लेकिन वे तमिल विद्रोहियों के बड़े आलोचक थे. कई देशों में एलटीटीई पर पाबंदी लगवाने में उनकी बड़ी भूमिका मानी जाती है. इनमें ब्रिटेन और अमरीका भी शामिल हैं. वैसे एलटीटीई ने उनकी हत्या के पीछे अपना हाथ होने से इनकार किया है और कहा है कि श्रीलंका में कई ऐसी ताक़तें हैं जो संघर्ष विराम की विरोधी हैं. विदेश मंत्री कदिरगामर की हत्या के बाद श्रीलंका में आपातकाल लगा दिया गया है और बड़ी संख्या में सैनिक राजधानी कोलंबो में तैनात किए गए हैं. वायु सेना और नौ सेना को भी सतर्क कर दिया गया है. |
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