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आठ दिन बाद बच्ची को बचाया गया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के भूकंप प्रभावित बालाकोट के एक गाँव से 11 वर्ष की एक लड़की को आठ दिन बाद मलबे से जीवित बाहर निकाला है. पाकिस्तान की सेना ने यह जानकारी दी है. आठ अक्तूबर को आए विनाशकारी भूकंप में हज़ारों लोग मारे गए हैं. पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता जनरल शौकत सुल्तान ने बीबीसी को बताया कि नौ और सात साल के दो बच्चे सात किलोमीटर चल कर आए और सेना को अपनी बहन के मलबे में फँसे होने के बारे में बताया. इन दोनों बच्चों के पास एक सात महीने का बच्चा भी था. शौकत सुल्तान ने बताया, "ये बच्चे पश्चिमोत्तर सीमा प्रांत के बालाकोट इलाक़े के सांगर गाँव के रहने वाले हैं और सात किलोमीटर चल कर ये बालाकोट पहुँचे थे." शौकत सुल्तान ने बताया कि शायद इन बच्चों को अपनी बहन के जीवित बच जाने का अंदाज़ा था और इसी कारण वे सात किलोमीटर चल कर सेना के कैंप तक पहुँच गए. उन्होंने बताया कि भूकंप में इन बच्चों के माता-पिता की मौत हो गई है. शौकत सुल्तान ने इन बच्चों की बहादुरी की प्रशंसा की और कहा कि ये असली हीरो हैं. उन्होंने बताया कि मलबे से निकाली गई बच्ची ठीक है. हालाँकि ये नहीं पता चल पाया है कि ये बच्चे इतने दिनों तक कहाँ थे और कैसे रहे. शुक्रवार को भूकंप के छह दिनों बाद एक 18 महीने की बच्ची को मलबे से जीवित बाहर निकाला गया था. |
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