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खुले आसमान के नीचे तीसरी रात | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत और पाकिस्तान के भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में हज़ारों लोग बेघर हैं और उनमें से अधिकतर लोगों को लगातार तीसरी रात खुले आसमान के नीचे बितानी पड़ रही है. पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार भूकंप के कारण कम-से-कम 20 हज़ार लोग मारे गए हैं. घायलों की संख्या 40 हज़ार से अधिक बताई गई है. भारत प्रशासित कश्मीर में अधिकारियों के अनुसार कम-से-कम 950 लोग मारे गए हैं.
पाकिस्तानी अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि भूकंप आने के बाद आरंभ में वे बेहद परेशानी में थे लेकिन अब धीरे-धीरे राहत कार्य में गति आ रही है. विदेशों से भी तंबू, कंबल और हेलिकॉप्टर पहुँचने शुरू हो गए हैं. अफ़ग़ानिस्तान स्थित अमरीकी सैनिक अड्डे से छह हेलिकॉप्टर पाकिस्तान पहुँच गए हैं. पाकिस्तान ने भारत की सहायता की पेशकश स्वीकार कर ली है और मंगलवार को एक विमान राहत सामग्रियाँ लेकर पाकिस्तान जाएगा. लेकिन पाकिस्तानी सूचना मंत्री शेख़ रशीद अहमद ने कहा है कि अभी और राहत सामग्रियों की आवश्यकता है. देरी और असंतोष पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की राजधानी मुज़फ़्फ़राबाद और उत्तर पश्चिम सीमा प्रांत के शहर बालाकोट में भूकंप के 48 घंटे बाद खाने-पीने का सामान औऱ चिकित्सा सामग्रियाँ पहुँचनी शुरू हुई हैं. चट्टानों के टूटकर गिरने के कारण सड़कों और पुलों पर यातायात बाधित हो गया था जिसके कारण राहत कार्य में भारी मुश्किल आ रही थी. लेकिन अब पाकिस्तानी अधिकारियों ने कहा है कि मुज़फ़्फ़राबाद और बालाकोट में सड़कें फिर से चालू हो गई हैं. कश्मीर क्षेत्र में पिछली एक शताब्दी में आए सबसे ताक़तवर भूकंप का केंद्र मुज़फ़्फ़राबाद के पास था. रिक्टर पैमाने पर 7.6 की तीव्रता वाले भूकंप के कारण दोनों ही शहरों में अधिकतर घर और इमारतें ढह चुके हैं. मुज़फ़्फ़राबाद में लगभग सारी की सारी आबादी खुले आसमान के नीचे जीवन व्यतीत कर रही है और उनमें राहत कार्यों की स्थिति को लेकर भारी ग़ुस्सा है. मुज़फ़्फ़राबाद में मौजूद बीबीसी संवाददाता आमिर अहमद ख़ान के अनुसार लोग बेसब्र हो रहे हैं और राहत सामग्रियाँ और टूटे हुए दुकानों व घरों में लूट-पाट की भी ख़बरें मिल रही हैं. लेकिन पाकिस्तान सरकार का कहना है कि उन्होंने राहत सामग्रियाँ पहुँचाने के लिए अपनी तरफ़ से पूरा प्रयास किया. पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल शौकत सुल्तान ने बीबीसी हिंदी सेवा को बताया कि अभी कोशिश इस बात की हो रही है कि शहरों से दूर ऐसे क्षेत्रों में पहुँचा जाए जहाँ अभी तक नहीं पहुँचा जा सका है.
मेजर जनरल शौकत सुल्तान ने कहा,"अभी भूकंप को आए 48 घंटे हुए हैं और राहत सामग्रियाँ पहुँचाने में इतना समय तो किसी विकसित देश में भी लग जाता है, हमारा देश तो तीसरी दुनिया का देश है". उन्होंने कहा कि एक परेशानी ये भी है कि ये हादसा किसी एक ही जगह पर नहीं हुआ है बल्कि इसका दायरा बहुत व्यापक है. मेजर जनरल शौकत सुल्तान का कहना था कि सेना के हेलिकॉप्टरों ने रविवार को 150 उड़ानें भरीं और कई लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया. उन्होंने ये भी बताया कि भूकंप में पाकिस्तानी सेना के लगभग 300 जवानों की मौत हो गई है और 500 घायल हुए हैं. राहत कार्य और सहायता प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने वाले बीबीसी उर्दू सेवा के संवाददाता शाहज़ेब जीलानी और ज़ुल्फ़िकार अली ने कहा कि राष्ट्रपति परेवज़ मुशर्रफ़ की अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील के बाद प्रभावित इलाक़ों में राहत पहुँचनी शुरु हो गई है. जापान, चीन, एशियाई विकास बैंक और अमरीका की ओर से राहत सामग्रियाँ भेजी गई हैं.
अमरीका ने राहत कार्य के लिए एक करोड़ डॉलर और कुवैत ने 10 करोड़ डॉलर देने की घोषणा की है. संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी ने कहा है कि पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय सहायता में तालमेल के लिए संयुक्त राष्ट्र से केंद्रीय भूमिका निभाने का आग्रह किया है. प्रधानमंत्री प्रभावित क्षेत्रों के लिए पहले ही पाँच अरब रुपए के पैकेज की घोषणा कर चुके हैं. मरने वालों को एक लाख रूपए का मुआवज़ा और घायलों को 50 हज़ार रुपए दिए जाएँगे. पाकिस्तान में इस त्रासदी के बाद तीन दिन के शोक की घोषणा भी की गई है. बालाकोट, मुज़फ़्फ़राबाद, मनशेरा, इस्लामाबाद की स्थिति पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की राजधानी मुज़फ़्फ़राबाद में मौजूद विभिन्न से बीबीसी संवाददाताओं के अनुसार शहर मलबे में तब्दील हो चुका है. वहाँ क्रिकेट स्टेडियम में घायलों और बेघरों को रखा गया है. गंभीर रूप से घायल लोगों को हेलीकॉप्टर से राजधानी इस्लामाबाद पहुँचाया जा रहा है. पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के बाद भूकंप से बुरी तरह प्रभावित होने वाला दूसरा प्रांत है उत्तर पश्चिम सीमा प्रांत या सूबा सरहद. बीबीसी उर्दू के संवाददाता शाहज़ेब जीलानी के अनुसार इस प्रांत के शहर बालाकोट में 90 प्रतिशत इमारतें और मकान गिर गए हैं. उन्होंने वहाँ देखा कि लोग अपने बुरी तरह घायल बच्चों को पीठ पर उठाकर सुरक्षित जगहों पर इलाज के लिए लेजा रहे थे या मलबे से निकाल रहे थे. लोगों में ये गुस्सा था कि सेना उस इलाक़े में तो पहुँच गई है लेकिन उनकी मदद नहीं कर रही. एक इमारत के मलबे के पास खड़े अनेक लोगों ने शिकायत की कि लगभग 300 बच्चे मलबे के नीचे दबे हुए हैं लेकिन किसी तरह की मदद नहीं मिली है. वहीं मनसेरा ज़िले में स्कूलों की इमारत के गिरने से कम से कम 400 बच्चों की मौत हो गई है. पूरे सूबा सरहद में भूकंप के कारण 1800 से ज़्यादा लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है. हज़ारों अन्य लोग घायल बताए जाते हैं. राजधानी इस्लामाबाद में भूकंप के कारण एक दस मंजिला इमारत गिर गई जिससे अभी तक कम-से-कम 25 लोगों के मारे जाने की ख़बर है.मलबे से 90 घायल लोगों को भी निकाला गया है. नक्शे पर भूकंप प्रभावित इलाक़े:-
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