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और अपने वकील ख़ुद बन गए लालू... | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चारा घोटाले की सुनवाई के दौरान सोमवार को सीबीआई की विशेष अदालत में एक रोचक दृश्य सामने आया. राँची की इस अदालत में लालू प्रसाद यादव और जगन्नाथ मिश्रा सहित 170 लोगों के ख़िलाफ़ आरोप तय किए जाने थे. अभी सुनवाई शुरु हो ही रही थी कि लालू प्रसाद यादव ने कहा कि अपना बचाव वे ख़ुद करेंगे. न्यायमूर्ति एके सेनगुप्ता ने कहा कि जब उनके वकील साथ हैं तो वे अपना बचाव ख़ुद क्यों करना चाहते हैं. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इसके बाद लालू प्रसाद यादव ने कहा कि वे ख़ुद क़ानून के स्नातक हैं और वे अपना पक्ष ख़ुद रखना चाहते हैं. इसके बाद उन्हें अनुमति दी गई.
लालू यादव ने अपना बचाव करते हुए कहा कि शायद यह देश का पहला मामला होगा जिसमें शिकायतकर्ता पर ही आरोप लगाए जा रहे हैं. उन्होंने अदालत से कहा, "जब यह मामला सामने आया तब मेरी ही सरकार थी और इस मामले को हमने ही पकड़ा था और मामला दर्ज करवाया था." उन्होंने शिकायती लहजे में कहा कि बाद में उन पर ही आरोप मढ़ दिए गए और एफ़आईआर कर दिया गया. बाद में जब जगन्नाथ मिश्रा की बारी आई तो उन्होंने कहा कि जब घोटाला हुआ तो वे सरकार में नहीं थे विपक्ष के नेता थे और उन्हें बेवजह इस मामले में घसीट लिया गया है. इस पर लालू प्रसाद यादव ने तपाक से कहा कि मिश्रा जी ठीक नहीं कह रहे हैं क्योंकि वे पुराने मित्र हैं और साथ में जेल में भी रह चुके हैं. स्थानीय पत्रकार सलमान रावी के अनुसार लेकिन इसके बाद भी बात नहीं बनी और लालू प्रसाद यादव के ख़िलाफ़ आरोप तय कर दिया गया. |
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