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लालू, राबड़ी की याचिका ख़ारिज | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पटना हाई कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में रेल मंत्री लालू यादव और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की याचिका ख़ारिज कर दी है. यह चारा घोटाले से जुड़ा मामला है. जस्टिस आरएन प्रसाद ने एक पंक्ति के फ़ैसले में कहा कि खंडपीठ ने एकमत से लालू और राबड़ी की याचिका को ख़ारिज करने का फ़ैसला किया. लालू यादव और राबड़ी देवी ने उनके ख़िलाफ़ मुकदमा चलाने की राज्यपाल की अनुमति को चुनौती दी थी. सन् 2000 में तत्कालीन राज्यपाल वीसी पांडे ने दोनों के ख़िलाफ़ आय से अधिक संपत्ति के मामले में सीबीआई से मुक़दमा दायर करने को कहा था. इसके बाद सीबीआई ने एफ़आईआर दर्ज की थी. लालू और राबड़ी ने इस अनुमति को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. पांच साल पहले लालू और राबड़ी ने हाईकोर्ट में यह याचिका दायर की थी. लेकिन यह मामला एक न्यायधीश वाली खंडपीठ के पास गया. जस्टिस नारायण रॉय ने इस मामले को बड़ी खंडपीठ के पास स्थानांतरित करने की सिफ़ारिश की. दो बार हाईकोर्ट की खंडपीठों ने इस मामले में फ़ैसला सुरक्षित रखा लेकिन किसी कारणवश फ़ैसला नहीं सुनाया जा सका. सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि इस मामले को जल्द निपटाया जाए. चारा घोटाला उल्लेखनीय है कि सीबीआई की एक विशेष अदालत ने चारा घोटाले के मामले में लालू प्रसाद यादव के ख़िलाफ़ आरोप तय कर दिए हैं. सीबीआई ने लालू यादव के ख़िलाफ़ दिसंबर, 1995 और जनवरी,1996 के बीच दुमका कोषागार से 3.13 करोड़ रुपए फर्ज़ी तरीके से निकालने का आरोप लगाया है. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र और 37 अन्य लोगों के ख़िलाफ़ भी आरोप तय किए गए हैं. इन लोगों पर आरोप है कि इन्होंने फ़र्जी बिलों के आधार पर सरकारी खजाने से गबन किया था. पशुपालन विभाग के खाते में हुई इस गड़बड़ी को चारा घोटाले का नाम दिया गया था. जब यह घोटाला हुआ तब लालू प्रसाद यादव बिहारी के मुख्यमंत्री थे. इस घोटाले में शामिल होने के आरोपों के बाद लालू प्रसाद यादव को मुख्यमंत्री का पद छोड़ना पड़ा था. सन् 1996 में बिहार में 950 करोड़ रुपए का चारा घोटाला सामने आया था. |
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