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बिहार स्थिति पर वामदलों की चर्चा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में वामपंथी दल बिहार की राजनीतिक स्थिति को लेकर चिंतित हैं और उन्होंने विशेष बैठकों में इस पर विचार विमर्श किया जा रहा है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) की केंद्रीय समिति की दिल्ली में बैठक चल रही है और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के पोलित ब्यूरो की कोलकाता में हुई एक बैठक में बिहार की स्थिति पर विचार विमर्श किया गया. सीपीआई के सामने दुविधा खड़ी हो गई है क्योंकि उसकी बिहार इकाई ने लालू यादव वाले राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के साथ विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने की सलाह दी है. ये नेता चाहते हैं कि वामपंथी दल मिलकर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ें और किसी अन्य दल से गठजोड़ न करें. दूसरी ओर सीपीएम पोलित ब्यूरो की कोलकाता में बैठक हुई और उसके बाद उनकी केंद्रीय समिति की बैठक होनी है. सीपीएम पोलित ब्यूरो की बैठक में बिहार की राजनीतिक स्थिति और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बढ़ोत्तरी के सरकार के प्रस्तावित क़दम पर चर्चा हुई. बैठक के बाद सीपीएम के वरिष्ठ नेता ज्योति बसु ने कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों के मूल्यों में वृद्धि की जाती है तो सीपीएम देशव्यापी आंदोलन छेड़ेगी. उनका कहना था कि इस बारे में हमने वैकल्पिक प्रस्ताव भी सरकार के सामने रखे हैं. वामपंथी दलों के दो घटकों ऑल इंडिया फ़ॉरवर्ड ब्लॉक और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) ने चारा घोटाले से जुड़े एक और मामले में लालू यादव के ख़िलाफ़ आरोप तय होने के बाद उनके इस्तीफ़े की मांग की थी. फ़ॉरवर्ड ब्लॉक नेता और सांसद देबब्रत बिस्वास और आरएसपी नेता और सांसद अबनी राय ने बीबीसी से बातचीत में कहा था कि लालू यादव को नैतिकता के आधार पर मंत्रिपद से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए. हालाँकि दोनों नेताओं ने भी कहा कि आपराधिक मामलों में लिप्त होने पर केवल लालू यादव ही नहीं, हर नेता को इस्तीफ़ा देना चाहिए. |
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