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चारा घोटाला: लालू यादव पर आरोप तय | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चारा घोटाले में राँची में सीबीआई की दो विशेष अदालतों में रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा सहित 170 लोगों के ख़िलाफ़ आरोप तय किए गए हैं. चारा घोटाले के विभिन्न मामलों में से यह अब तक का सबसे बड़ा मामला है. इसमें राँची और डोरांडा के सरकारी खज़ाने से 182 करोड़ से ज़्यादा की राशि और देवघर के सरकारी खज़ाने से 95 लाख रुपयों के गबन का आरोप है. सोमवार को दो अलग-अलग मामलों में दो विशेष अदालतों में आरोप तय किए गए. सीबीआई की विशेष अदालत के न्यायाधीश एके सेनगुप्ता और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की अदालत में आरोप तय किए गए हैं. जिस समय आरोप तय किए गए अदालत में लालू प्रसाद यादव और जगन्नाथ मिश्रा सहित अन्य लोग मौजूद थे. एक मामले में तो लालू प्रसाद यादव ने अपने मामले में अपने वकील की भूमिका ख़ुद ही निभाई. इन लोगों पर आरोप हैं कि इन्होंने फ़र्जी बिलों के आधार पर रुपए निकाल लिए. अपने वकील ख़ुद चारा घोटाले की सुनवाई के दौरान एक मज़ेदार वाकया सामने आया जब लालू प्रसाद यादव ने कहा कि अपना बचाव वे ख़ुद करेंगे. न्यायमूर्ति एके सेनगुप्ता की अदालत में जब लालू प्रसाद यादव खड़े हुए तो न्यायाधीश ने कहा कि जब उनके वकील हैं तो वे अपना बचाव ख़ुद क्यों करना चाहते हैं.
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इसके बाद लालू प्रसाद यादव ने कहा कि वे ख़ुद क़ानून के स्नातक हैं और वे अपना पक्ष ख़ुद रखना चाहते हैं. इसके बाद उन्हें अनुमति दी गई. लालू यादव ने अपना बचाव करते हुए कहा कि शायद यह देश का पहला मामला होगा जिसमें शिकायतकर्ता पर ही आरोप लगाए जा रहे हैं. उन्होंने अदालत से कहा, "जब यह मामला सामने आया तब मेरी ही सरकार थी और इस मामले को हमने ही पकड़ा था और मामला दर्ज करवाया था." उन्होंने शिकायती लहजे में कहा कि बाद में उन पर ही आरोप मढ़ दिए गए. बाद में जब जगन्नाथ मिश्रा की बारी आई तो उन्होंने कहा कि जब घोटाला हुआ तो वे सरकार में नहीं थे और उन्हें बेवजह इस मामले में घसीट लिया गया है. इस पर लालू प्रसाद यादव ने तपाक से कहा कि मिश्रा जी ठीक नहीं कह रहे हैं क्योंकि वे पुराने मित्र हैं और साथ में जेल में भी रह चुके हैं. मामला उल्लेखनीय है कि 1996 में चारा घोटाला सामने आया था. इस घोटाले में पशुपालन विभाग के खातों में गड़बड़ी करके सरकारी खज़ाने से लगभग 950 करोड़ रुपए निकाल लिए गए थे. उस समय लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे और जनन्नाथ मिश्र विपक्ष के नेता थे. इसे लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था और इसकी जाँच सीबीआई को सौंप दी गई थी. इसी के चलते लालू प्रसाद यादव को मुख्यमंत्री का पद छोड़ना पड़ा था और इसी मामले में उन्हें कई बार गिरफ़्तार किया जा चुका है. बाद में बिहार से झारखंड राज्य अलग हो गया और चारा घोटाले के कई मामले झारखंड में स्थानांतरित कर दिए गए. |
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