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पंजाब के सिख माफ़ी से संतुष्ट नहीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पंजाब में प्रमुख विपक्षी दल समेत कई संगठनों ने नानावती आयोग की रिपोर्ट आने के बाद प्रधानमंत्री की माफ़ी और टाइटलर और सज्जन कुमार के इस्तीफ़ों को नाकाफ़ी बताया है. मुख्य विपक्षी दल शिरोमणि अकाली दल ने 1984 के दंगों के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की माफ़ी को अस्वीकार कर दिया है. उनका कहना है कि जिस समय दंगे हुए उस समय मनमोहन सिंह सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के सदस्य ही नहीं थे. अकाली दल के प्रवक्ता हरचरण सिंह बैंस ने कहा,"1984 के क़त्ले-आम के लिए सिख लोग कांग्रेस पार्टी और नेहरू-गाँधी परिवार को सीधे तौर पर ज़िम्मेदार मानते हैं ". उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह का माफ़ी माँगना अपनी जगह ठीक है लेकिन बेहतर होता अगर स्वयं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने अपने परिवार की तरफ़ से क्षमा माँगी होती. इससे पहले पंजाब के तमाम सिख संगठनों ने केंद्रीय मंत्री जगदीश टाइटलर और सज्जन कुमार के इस्तीफ़ों को कांग्रेस पार्टी के लंबे अर्से से चले आ रहे षडयंत्र का एक और हिस्सा बताया है. शिरोमणि अकाली दल(बादल), शिरोमणि अकाली दल(मान), दल ख़ालसा, शिरोमणि ख़ालसा पंचायत और कुछ अन्य संगठनों ने अलग-अलग बयान जारी कर कांग्रेस के दोषी नेताओं को गिरफ़्तार करने और उनके ख़िलाफ़ मुक़दमे चलाने की अपनी माँग दोहराई है. इन संगठनों ने पंजाब में रहने वाले सभी सिखों से अपील की है कि वे अगले सप्ताह स्वतंत्रता दिवस के दिन अपने-अपने घरों पर काले झंडे लगाएँ. उन्होंने छात्रों से इस दिन स्कूल से दूर रहने और सभी सिखों से काली पगड़ियाँ पहनने का आग्रह किया है. पंजाब राइट्स फ़ोरम के प्रवक्ता प्रोफ़ेसर जगमोहन सिंह ने कहा है कि 15 अगस्त सिखों के लिए भारत सरकार औऱ कांग्रेस पार्टी के ख़िलाफ़ अपने रोष को प्रकट करने का दिन होगा. |
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