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बिहार में तबादलों पर विवाद गहराया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बिहार में भारतीय पुलिस सेवा के 17 अधिकारियों के तबादले से राजनीतिक माहौल गरमा गया है. समाचार एजेंसियों के अनुसार राज्यपाल बूटा सिंह ने कहा है कि वे इस आदेश को वापस नहीं लेंगे और ये पूरे मामले में उनका अंतिम निर्णय है. विवाद तब पैदा हुआ जब राज्य के मुख्य सचिव जी एस कंग की सहमति के बिना 17 पुलिस अधिकारियों का तबादला हुआ और कंग लंबी छुट्टी पर चले गए. बीबीसी संवाददाता मणिकांत ठाकुर के अनुसार तबादले विवाद का कारण इसलिए भी बने क्योंकि बिहार में क़ानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर प्रशासन पर लगातार आरोप लगते रहे हैं. उनका कहना है कि आम लोगों में अच्छी छवि रखने वाले अफ़सरों का जब तबादला होता है तो लोगों को लगता है कि प्रभावी अधिकारियों के चले जाने से क़ानून व्यवस्था पर और असर पड़ेगा. मणिकांत ठाकुर के अनुसार बिहार में चुनावों से पहले वहाँ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन अपने चुनाव अभियान के तहत यात्रा निकाल रहा है. उनके अनुसार इस मुद्दे पर राजग ने राज्यपाल पर आरोप भी लगाने शुरु कर दिए हैं. जहाँ राज्यपाल ने मुख्य सचिव के लंबी छुट्टी पर जाने के फ़ैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है वहीं उन्होंने ये भी दावा किया है कि प्रशासन में इस मुद्दे को लेकर संकट की स्थिति नहीं है. उधर भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष लालकृष्णी आडवाणी ने इस विषय में चिंता जताई है और केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल से भी बात की है. |
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