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बिहार के मसले पर जनहित याचिका | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बिहार विधानसभा भंग किए जाने के ख़िलाफ़ सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है. इस याचिका में अनुरोध किया गया है कि बिहार विधानसभा भंग करने के केंद्र सरकार के आदेश को रद्द किया जाए और वहाँ चुनाव तब तक न कराए जाएँ जब तक इस याचिका पर सुनवाई न हो जाए. यह याचिका शिवकुमार प्रसाद सिंह ने दायर की है. उल्लेखनीय है कि 22 मई की रात केंद्र सरकार ने बिहार विधानसभा भंग करने का फ़ैसला किया था. और इससे पहले राज्यपाल बूटासिंह ने भी विधानसभा भंग करने की अनुशंसा की थी. एक मतदाता की तरह दायर अपनी याचिका में शिवकुमार प्रसाद सिंह ने कहा है कि बिहार विधानसभा को भंग करना संवैधानिक प्रावधानों के ख़िलाफ़ है. याचिका चुनाव आयोग, बिहार के राज्यपाल और केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ है. इसके बाद विपक्षी दलों ने इस फ़ैसले का विरोध किया था और इसे केंद्र सरकार का षडयंत्र बताया था. भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने भी कहा था कि वे बिहार विधानसभा भंग करने के फ़ैसले के ख़िलाफ़ न्यायालय में जाएँगे लेकिन सोमवार को भाजपा के उपाध्यक्ष मुख़्तार अब्बास नक़वी ने कहा कि पार्टी की ओर से कोई याचिका दायर नहीं की जा रही है. हालांकि उन्होंने पार्टी सदस्यों के रूप में व्यक्तिगत याचिकाओं की संभावना से इंकार नहीं किया है. संभावना जताई जा रही है कि मंगलवार को इसी मसले पर कोई याचिका सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की जा सकती है. इस बीच बिहार में चुनाव की तिथियों को लेकर भी राजनीतिक दलों में विवाद चल रहा है और चुनाव आयोग का एक दल बिहार में परिस्थियों का जायज़ा लेकर लौटा है. |
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