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बिहार विधानसभा भंग करने को मंज़ूरी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने पत्रकारों को बताया है कि राष्ट्रपति ने बिहार की विधानसभा को भंग करने की मंज़ूरी दे दी है. इसके बाद अब राज्य में फिर से विधानसभा चुनाव ही एकमात्र विकल्प बचा है. शिवराज पाटिल ने कहा कि बिहार में ग़ैरकानूनी और असंवैधानिक हालात बन रहे थे इसलिए कैबिनेट को ऐसा फ़ैसला लेना पड़ा. राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति की बैठक रविवार को देर रात तकरीबन डेढ़ बजे तक चली और यह निर्णय लिया गया. पिछले दिनों के राजनीतिक घटनाक्रम को देखते हुए बिहार के राज्यपाल बूटा सिंह ने भी रविवार को राज्य की विधानसभा को भंग करने की सिफ़ारिश की थी. इसपर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भाजपा उपाध्यक्ष वेंकैया नायडु ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि यह सोची समझी साजिश के तहत किया गया है. उन्होंने कहा कि इससे यूपीए सरकार की यह मंशा साफ़ हो गई है कि वो देश में कोई भी ग़ैर-कांग्रेसी सरकार नहीं चाहती है. उन्होंने इसे लोकतंत्र की हत्या और आपातकाल के दौर की वापसी बताया. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने इस पूरे घटनाक्रम को ध्यान में रखते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के घर पर एक आपात बैठक बुलाई है और वहाँ आगे की रणनीति पर विचार विमर्श होगा. इस निर्णय के विरोध में एनडीए की ओऱ से कल बिहार बंद का आह्वान भी किया गया है. ग़ौरतलब है कि पिछले दिनों लोकजनशक्ति पार्टी के कुछ विधायकों को एक नाटकीय घटनाक्रम में झारखंड ले जाया गया था. इससे पहले झारखंड में भी सरकार गठन से पहले इस तरह के प्रयास हुए थे और कुछ निर्दलीय विधायकों को राजस्थान ले जाया गया था लेकिन इस बार बिहार के राज्यपाल बूटा सिंह ने पहले से ही इसे असंवैधानिक गतिविधियाँ बताते हुए इस बाबत अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप दी थी. इसी रिपोर्ट और तेजी से बदलते घटनाक्रम को ध्यान में रखते हुए कैबिनेट की देर रात तक चली बैठक में रविवार की रात यह निर्णय लिया गया जिसे अब राष्ट्रपति की मंज़ूरी दे दी गई है. |
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