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बिहार में राष्ट्रपति शासन को मंज़ूरी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लोकसभा ने बिहार में राष्ट्रपति शासन को मंज़ूरी दे दी है. इस मुद्दे पर बहस के दौरान राष्ट्रीय जनता दल ने सदन से बहिर्गमन किया. शनिवार को लोकसभा में बिहार के मुद्दे पर ज़ोरदार बहस हुई. प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित किया गया. राज्य में राष्ट्रपति शासन के प्रस्ताव को अब संसद के उच्च सदन राज्यसभा की मंज़ूरी मिलनी है. विधानसभा चुनावों में खंडित जनादेश आने के बाद राज्य में ज़रूरी बहुमत तक कोई गठजोड़ नहीं पहुँच पाया था. राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने इस बात से इनकार किया है कि वह बिहार के राज्यपाल के सलाहकार के रूप में अपने लोगों को नियुक्त कराने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव डाल रहे हैं. उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय जनता दल केंद्र की यूपीए सरकार के प्रमुख घटकों में से है. लालू प्रसाद यादव की पार्टी ने बिहार में 15 वर्षों तक शासन किया है. राज्यपाल बूटा सिंह ने बिहार में नई सरकार की गठन की संभावना के अभाव में, राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफ़ारिश की थी. विधानसभा का कार्यकाल छह मार्च तक था और इस दिन तक राज्य में नई सरकार के गठन के लिए त्रिशंकु विधानसभा में आवश्यक बहुमत कोई दल नहीं जुटा पाया. |
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