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यह लोकतंत्र की हत्या है: एनडीए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में एक ओर वर्तमान केंद्र सरकार ने बिहार विधानसभा को भंग करने के अपने निर्णय को वहाँ की राजनीतिक स्थितियों को ध्यान में रखते हुए एक आवश्यक कदम बताया है वहीं पिछली राजग सरकार के घटक दलों ने इसकी भर्त्सना करते हुए इस लोकतंत्र की हत्या क़रार दिया है. पत्रकारों को संबोधित करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा कि जिस तरह बिहार विधानसभा को भंग करने में सरकार ने तेज़ी दिखाई है, वैसे ही वहाँ चुनाव कराने में भी दिखानी चाहिए. उन्होंने कहा कि वहाँ जल्दी और निष्पक्ष चुनाव होने चाहिए. उधर भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने इसे 1975 का दोहराया जाना बताया और कहा कि भारत एक बार फिर आपातकाल के दौर में भेज दिया गया है.
ग़ौरतलब है कि सोमवार की सुबह पत्रकारों से बातचीत करते हुए गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने बताया कि राष्ट्रपति ने बिहार में विधानसभा भंग करने का मंज़ूरी दे दी है. क्यों किया भंग इससे पहले रविवार को देर रात तक चली कैबिनेट की बैठक में तकरीबन रात डेढ़ बजे यह निर्णय लिया गया कि बिहार विधानसभा को भंग कर दिया जाए. कैबिनेट ने यह फ़ैसला राज्य के राज्यपाल, बूटा सिंह की रिपोर्ट के आधार पर लिया जिसमें कहा गया है कि पिछले दिनों की राजनीतिक गतिविधियों में तेजी से विधायकों की ख़रीद-फ़रोख़्त का काम चल रहा था जिसके मद्देनज़र राज्य विधानसभा को भंग करना ही एकमात्र विकल्प है. राज्यपाल बूटा सिंह ने बीबीसी से ख़ास बातचीत में बताया, “सरकार बनाने के लिए विधायकों की ख़रीद-फ़रोख़्त विधायकों को दूसरे राज्यों में ले जाकर हो रही थी जो कि ग़लत है और इसीलिए मैंने विधानसभा भंग करने की सिफ़ारिश की.” उन्होंने कहा, “मैंने तीन महीने तक इंतज़ार किया कि तमाम राजनीतिक दल आपस में मिलें और राज्य में एक लोकतांत्रिक सरकार का गठन हो पर कोई नतीजा नहीं निकला. पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम के मद्देनज़र ऐसा करना ज़रूरी हो गया था. हमारे पास और कोई विकल्प नहीं था.” सरकार के इस फ़ैसले का वामदलों ने भी समर्थन किया है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता, डी राजा ने बीबीसी को बताया कि राज्य के राजनीतिक घटनाक्रम के अनैतिक और असंवैधानिक हो जाने के बाद सरकार के पास कोई विकल्प नहीं था. नहीं ख़रीदे विधायक पर जनता दल युनाइटेड के अध्य़क्ष नितीश कुमार इस आरोप को बकवास बता रहे हैं. उन्होंने कहा, “सब बकवास है, सरकार बनाने के प्रयास तो अप्रैल के पहले हफ़्ते से ही शुरू हो गए थे. जब केंद्र को लगा कि हम सरकार बना लेंगे तो इन्होंने कैबिनेट की आपात बैठक बुलाई और एक साजिश के तहत विधानसभा भंग कर दी गई.” उन्होंने बिहार के राज्यपाल को केंद्र सरकार का प्रवक्ता बताते हुए उन्हें तुरंत हटाए जाने की माँग की. उधर भाजपा उपाध्यक्ष वेंकैया नायडु ने भी इस बाबत पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार के इस कदम के बाद यह साफ़ हो गया है कि केंद्र सरकार किसी भी राज्य में ग़ैर कांग्रेस सरकार नहीं आने देना चाहती है. बिहार में विधानसभा भंग किए जाने के विरोध में राज्य की राजधानी, पटना समेत कई जगहों पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और रामबिलास पासवान के पुतले फूँके. एनडीए की ओर से मंगलवार को बिहार बंद का आह्वान भी किया गया है. आगे क्या होगा पर राज्य में अब क्या होगा. बस एक ही विकल्प बाकी है और वो है चुनाव. सत्ता के तमाम गलियारे भी इस बात को स्वीकार रहे हैं कि चुनाव के लिए कमर कसने के अलावा अब और कोई विकल्प नहीं है. पर चुनाव कब होगा, इस बारे में कोई स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है. दिल्ली में वरिष्ठ पत्रकार संकर्षण ठाकुर से जब बीबीसी ने इस बाबत बातचीत की तो उन्होंने बताया, “जुलाई के बाद बिहार में बाढ़ और वर्षा को देखते हुए चुनाव की कोई संभावना सितंबर तक तो नहीं बनती और मुझे नहीं लगता कि सरकार जुलाई से पहले चुनाव करा पाने की स्थिति में है.” साथ ही उन्होंने कहा, “पिछले दो दिनों की गतिविधियों को राजनीतिक प्रक्रिया नहीं कहा जा सकता, यह साफ़ हो गया था कि विधायकों की ख़रीद-फ़रोख़्त हो रही है. राज्य के नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर अगले चार-आठ महीनों में अभी कुछ भी कहना जल्दबाज़ी होगा.” |
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