|
पासवान ने सुझाया नया फ़ार्मूला | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लोकजनशक्ति पार्टी के नेता रामविलास पासवान ने अपना रुख नरम करते हुए संकेत दिए हैं कि यदि कांग्रेस अल्पसंख्यक मुख्यमंत्री बनाती है तो वे आरजेडी के साथ भी सरकार बनाने पर विचार कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि बिहार में हर हाल में धर्मनिरपेक्ष सरकार बने और इसके लिए यदि उन्हे झुकना पड़ेगा तो वे इसके लिए भी तैयार हैं. हालांकि वे इस बात पर अभी भी अड़े हुए हैं कि लोकजनशक्ति पार्टी को भाजपा और आरजेडी का मुख्यमंत्री मंज़ूर नहीं है. दूसरी ओर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने पासवान के इस फ़ार्मूले को ठुकराते हुए कहा है कि ये ख़ुद मुख्यमंत्री बनने की उनकी चाल है. अपने प्रस्ताव के साथ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलने के बाद रामविलास पासवान ने दावा किया है कि उन्होंने इस पर विचार करने का आश्वासन दिया है. उल्लेखनीय है कि सरकार बनने की कोई स्थिति न बन पाने के कारण बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा है और वहाँ राष्ट्रपति शासन लगे हुए तीन महीने से अधिक समय बीत गया है. रामविलास पासवान ने गुरुवार को एक पत्रकारवार्ता बुलवाकर अपना रुख़ नरम करने की घोषणा उस समय की है जब यह चर्चा ज़ोरों पर है कि उनकी पार्टी के तक़रीबन 20 विधायक टूट कर आरजेडी में जा रहे हैं. जेडी यू रामविलास पासवान ने कहा कि वे आज भी अपने पुराने प्रस्ताव पर क़ायम हैं कि यदि जेडीयू भाजपा को छोड़कर आ जाए वे उसके साथ मिलकर सरकार बनाने को तैयार हैं. जो गणित वे समझा रहे हैं उसके हिसाब से कांग्रेस का सरकार में होना या सरकार को समर्थन देना हर हाल में ज़रूरी होगा. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस किसी अल्पसंख्यक को मुख्यमंत्री बनाने को तैयार होती है तो वे किसी भी प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने को तैयार हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे आरजेडी के साथ साझा सरकार के लिए तैयार हैं तो उन्होंने कहा कि वे सरकार के गठन के लिए झुकने को तैयार हैं. उनका कहना था कि बिहार का कोई विधायक नहीं चाहता कि इस समय चुनाव हो और वे इस आरोप को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं कि पासवान की वजह से बिहार में सरकार नहीं बन पा रही है. आरजेडी ने फ़ार्मूला ठुकराया केंद्रीय मंत्री और आरजेडी नेता प्रेम गुप्ता ने रामविलास पासवान के फ़ार्मूले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि यह उन्हें किसी भी हाल में मंज़ूर नहीं है. बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा कि समझना चाहिए कि यह पासवान की ख़ुद मुख्यमंत्री बनने की चाल है क्योंकि उनकी पार्टी से कोई भी अल्पसंख्यक नेता चुनकर विधानसभा में नहीं आया है. उन्होंने पलटकर पूछा कि क्या पासवान सचमुच चाहते हैं कि आठ विधायकों वाली पार्टी (कांग्रेस) से किसी को मुख्यमंत्री बना दिया जाए. केंद्रीय मंत्री गुप्ता ने पूछा कि क्या रामविलास पासवान समझते हैं कि आरजेडी को छूत की बीमारी है और यदि ऐसा है तो उन्होंने आरजेडी के साथ लोकसभा का चुनाव क्यों लड़ा था. उनका कहना था कि यदि पासवान को बिहार की जनता की चिंता है तो उन्हें सबसे बड़ी पार्टी आरजेडी को समर्थन देना चाहिए. कांग्रेस का पक्ष रामविलास पासवान ने अपने प्रस्ताव के साथ शाम को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी से मुलाक़ात की है. दस जनपथ में हुई इस मुलाक़ात के बाद पासवान ने दावा किया है कि सोनिया गाँधी ने इस प्रस्ताव पर विचार विमर्श करने का आश्वासन दिया है. उन्होंने कहा कि वे यह प्रस्ताव भी रख रहे हैं कि जैसे 1996 में देवगौड़ा की धर्मनिरपेक्ष सरकार को सबने बाहर से समर्थन दिया था उसी तरह बिहार की धर्मनिरपेक्ष सरकार को सभी धर्मनिरपेक्ष पार्टियाँ समर्थन दें. उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के पास 8 विधायक हैं और कांग्रेस पहले कह चुकी है कि इतने छोटे दल के साथ वह अपना मुख्यमंत्री नहीं बनाना चाहती. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||