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चुनाव बाद गठबंधन को लेकर बहस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बिहार में मतदान के दो चरण पूरे हो गए हैं और अब राजनीतिक दलों ने चुनाव के बाद की स्थितियों पर ग़ौर करना शुरू कर दिया है. लेकिन लोक जनशाक्ति पार्टी के नेता रामविलास पासवान ने त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में बिहार में राष्ट्रपति शासन की बात कह कर नई बहस छेड़ दी है. राजनीतिक दलों ने पासवान के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. कुछ टीवी चैनलों के एक्ज़िट पोल ने बिहार में त्रिशंकु विधानसभा की भविष्यवाणी की है. इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पासवान ने कहा था कि वो लालू यादव के राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और भाजपा- जनता दल-यू गठबंधन को समर्थन देने अथवा लेने की बजाए राज्य में राष्ट्रपति शासन पसंद करेंगे. उनका कहना था कि उनकी पार्टी न तो आरजेडी को बाहर से समर्थन करेगी और न ही उसके साथ सत्ता में भागीदारी करेगी. ज़रूरत पड़ने पर यूपीए के घटक दल आरजेडी को समर्थन देने के सवाल पर पासवान ने पत्रकारों से कहा,'' मैने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि मैं अपने जीवन में आरजेडी के साथ नहीं जाऊंगा.'' पासवान के बयान पर कांग्रेस और भाजपा ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. कांग्रेस नेता और केंद्रीय गृह राज्यमंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने अपने बिहार दौरे के दौरान कहा कि इस समय बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाने की बात करना निरर्थक है और तर्कसंगत नहीं है. दूसरी ओर भाजपा महासचिव और बिहार के प्रभारी अरुण जेटली ने रामविलास के राष्ट्रपति शासन लगाने संबंधी बयान को हताशा में दिया वक्तव्य क़रार दिया है. बिहार में 23 फरवरी को तीसरे चरण का मतदान होना है. मतों की गिनती 27 फ़रवरी को होगी. |
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