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चुनाव आयोग का दल बिहार में | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बिहार में चुनाव तैयारियों का जायज़ा लेने के सिलसिले में चुनाव आयोग का दो सदस्यीय दल पटना में है. आयोग ने शुक्रवार को विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं से बातचीत की. आयोग के सदस्य राज्य प्रशासन के साथ चुनाव की तैयारियों के संबंध में बातचीत करेंगे. चुनाव आयोग का दल इस बात का आकलन करेगा कि राज्य में मतदान कराने के लिए व्यवस्था कराने में कितना समय लगेगा. यह दल राज्य के राजनीतिक दलों और प्रशासनिक अधिकारियों से विचार-विमर्श के बाद आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपेगा. चुनाव आयोग बिहार में चुनाव की तारीख़ों का फ़ैसला इस दल की रिपोर्ट के आधार पर करेगा. संभावना व्यक्त की जा रही है कि चुनाव आयोग अगले सप्ताह चुनाव की तारीख़ों की घोषणा कर सकता है. इस दल में उप चुनाव आयुक्त आनंद कुमार और आयोग के क़ानूनी सलाहकार एसके मेंहदीरत्ता शामिल हैं. जल्द चुनाव इधर बिहार में विधानसभा भंग होने के बाद चुनावों को लेकर सरगर्मी तेज़ हो गई है. राष्ट्रीय जनताँत्रिक गठबंधन (एनडीए) नेताओं का प्रतिनिधिमंडल बुधवार को चुनाव आयोग से मिला और उसने मानसून से पहले बिहार में विधानसभा चुनाव कराने की मांग की. साथ ही उन्होंने कम चरणों में चुनाव कराने की मांग की ताकि चुनावी प्रक्रिया जल्द पूरी हो सके. एनडीए नेताओं का कहना है कि यूपीए सरकार बिहार में लोकताँत्रिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर रही है. एनडीए नेताओं ने क़ानून मंत्री हंसराज भारद्वाज के उस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है जिसमें उन्होंने कहा था कि बिहार में सबसे जल्दी चुनाव सितंबर में ही संभव हैं. बिहार विधानसभा को भंग करने के निर्णय को 'असंवैधानिक' क़रार देते हुए एनडीए ने मंगलवार को बिहार बंद का आयोजन भी किया था. इस दौरान एनडीए समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी और लगभग एक हज़ार लोगों को गिरफ़्तार किया गया था. |
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