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'बिहार के मामले पर केंद्र सरकार पक्ष रखे' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने बिहार विधानसभा भंग किए जाने के मामले में केंद्र सरकार को अपना पक्ष रखने का आदेश दिया है. इस मामले में एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को कोई नोटिस जारी नहीं किया लेकिन आदेश दिया दो हफ़्ते के भीतर हलफ़नामा दायर कर याचिक में उठाए सवालों के जवाब दिए जाएँ. याचिका में अनुरोध किया गया है कि बिहार विधानसभा भंग करने के केंद्र सरकार के आदेश को रद्द कर देना चाहिए और वहाँ चुनाव तब तक नही कराने चाहिए जब तक इस मामले की सुनवाई न हो जाए. केंद्र सरकार का जवाब आने के एक हफ़्ते के भीतर याचिकाकर्ता को जवाब देना होगा और मामले की सुनवाई न्यायालय के गर्मियों के अवकाश के बाद ही हो पाएगी. उल्लेखनीय है कि 22 मई की रात को केंद्र सरकार ने बिहार विधानसभा भंग करने का फ़ैसला किया था. इससे पहले राज्यपाल बूटासिंह ने भी विधानसभा भंग करने की अनुशंसा की थी. राष्ट्रील जनतांत्रिक गठबंधन के विधायकों ने इस फ़ैसले का विरोध किया था और केंद्र सरकार पर संविधान का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था. उनका आरोप था कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि जनता दल (यू) नेता नीतिश कुमार की सरकार न बन सके. याचिका में दावा किया गया है कि लोक जनशक्ति पार्टी के 29 में से 22 विधायक जनता दल (यू) में शामिल होने पर सहमत हो गए थे. उधर ख़बर है कि शुक्रवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का एक प्रतिनिधिमंडल विधानसभा भंग किए जाने के विरुध राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से मिलेगा. |
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