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महाराष्ट्र में बाढ़ से भारी नुक़सान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
महाराष्ट्र में भारी बारिश और बाढ़ से भारी नुक़सान उठाना पड़ा है और मरनेवालों की संख्या 853 पहुँच गई है. इसमें से लगभग 400 लोगों की मौत मुंबई शहर में हुई. हालांकि भारत की वित्तीय राजधानी माने जानेवाली मुंबई में जनजीवन सामान्य हो चला है लेकिन महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में बारिश जारी रहने और बाढ़ का पानी भरे रहने के कारण राहत और बचाव कार्य में बाधा आ रही है. महाराष्ट्र का रायगढ़ ज़िला सबसे अधिक प्रभावित हुआ जहाँ बाढ़ के कारण शवों को निकाला नहीं जा सका है. राज्य सरकार ने हर गाँव के लिए 20 लाख रुपए की प्रारंभिक सहायता राशि की घोषणा की है.गाँवों में बाढ़ के कारण फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है. इस समय सरकार का राजस्व विभाग बाढ़ के कारण हुए नुक़सान के आकलन में जुटा है. हालांकि इस वक्त कुल कितना नुक़सान हुआ है, इसके आँकड़े उपलब्ध नहीं है.लेकिन यह करोड़ों में माना जा रहा है. आयात- निर्यात का प्रमुख केंद्र माना जानेवाला मुंबई बंदरगाह पिछले चार दिनों से बंद है. इसके अलावा हवाई अड्डा और मुंबई शेयर बाज़ार भी भारी बारिश और बाढ़ के कारण बंद करना पड़ा था. केंद्र सरकार ने तात्कालिक सहायता के रूप में महाराष्ट्र को 500 करोड़ रुपए देने की घोषणा की है. बाद में और सहायता राशि दी जाएगी. बीमारियों का ख़तरा इस बीच सरकारी अधिकारी बाढ़ के बाद महामारी फैलने की चिंताओं का सामना करते हुए एहतियाती उपाय कर रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि अब ऐसा नहीं लगता कि बहुत से लापता लोग जीवित बच पाएंगे.
हालाँकि अधिकारी अब भी मलबे में किसी के जीवित बचे होने की तलाश कर रहे हैं और मलबे को साफ़ करने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जा रहा है. सरकार का कहना है कि प्रभावित गाँवों में 200 डॉक्टरी दल किसी भी महामारी को रोकने की कोशिश कर रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि उनकी प्राथमिकता साफ़ पानी, खाना और दवाइयाँ उपलब्ध कराना है. राज्य के राहत सचिव कृष्ण वत्स ने कहा कि अब ध्यान बिजली, पानी जैसी बुनियादी ज़रूरतों और सूचना तंत्र को फिर से स्थापित करना है. |
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