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'कश्मीर सीमा 'अर्थहीन' हो सकती है' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री ने कहा है कि कश्मीर में सीमा को 'अर्थहीन और अप्रसांगिक' बनाने और भारत प्रशासित कश्मीर को अधिक स्वायत्ता देने से पाकिस्तान के साथ चल रहे विवाद को सुलझाने में सहायता मिल सकती है. मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत और पाकिस्तान सीमा को 'अर्थहीन और अप्रसांगिक' बनाने के लिए मिलकर क़दम उठा सकते हैं. दिल्ली में चुने हुए विदेशी पत्रकारों से बातचीत में भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा कि जब पाकिस्तान भारत के लचीले रूख़ की सीमाओं को समझ लेगा तो उसके बाद की स्थिति के लिए उन्होंने "स्काई इज़ द लिमिट" मुहावरे का इस्तेमाल किया, यानी उसके बाद संभावनाएँ अनंत होंगी. प्रधानमंत्री ने कहा, "जम्मू-कश्मीर की भारतीय संविधान में विशिष्ट जगह है, उसे अधिक से अधिक स्वायत्तता देने पर विचार किया जा सकता है." लेकिन दिल्ली में विदेशी पत्रकारों से बातचीत कर रहे भारतीय प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में बताया कि भारत को कश्मीर मामले में कौन सी स्थितियाँ स्वीकार नहीं हैं. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि "भारत का विभाजन किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता, न ही कश्मीर के नक्शे में किसी तरह का परिवर्तन संभव है." 'आतंकवाद' मनमोहन सिंह ने पाकिस्तान से कहा है कि वह अपने प्रशासन वाले कश्मीर से चलने वाले "इस्लामी आतंकवादियों के शिविरों को ख़त्म करे." प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच रिश्तों में सुधार के बावजूद पाकिस्तान ने इन शिविरों को समाप्त करने की दिशा में पर्याप्त काम नहीं किया है. भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवादियों के किसी बड़े हमले के कारण दोनों देशों के बीच चल रही शांति प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जैसा कि 2002 में भारतीय संसद पर हुए हमले के बाद हुआ था. लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि पाकिस्तान की तरफ़ से भारत में होने वाली घुसपैठ में कमी आई है और दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की दिशा में प्रगति हुई है. भारतीय प्रधानमंत्री के इस ताज़ा बयान पर अभी पाकिस्तान की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. |
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