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शुक्रवार, 27 मई, 2005 को 00:13 GMT तक के समाचार
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कश्मीर के दायरे में रहें कश्मीरी नेता
हुर्रियत के नेता
हुर्रियत के नेताओं को उम्मीद है कि उन्हें पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर से बाहर जाने दिया जाएगा
भारत सरकार का कहना है कि बातचीत के लिए पाकिस्तान जा रहे अलगाववादी कश्मीरी नेताओं को पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.

भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि अगर ये नेता पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के दायरे से बाहर जाते हैं तो "यह दोनों देशों के बीच बनी सहमति का उल्लंघन होगा."

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नवतेज सरना ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच इस बात पर स्पष्ट सहमति है कि श्रीनगर-मुज़फ़्फ़राबाद बस से यात्रा करने वाले लोग पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर से बाहर नहीं जाएँगे.

लेकिन अलगाववादी गुटों के संगठन ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के एक नेता का कहना है कि उनकी यात्रा पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए.

 शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाना महत्वपूर्ण है और इसके लिए यात्रा के नियमों में लचीलापन होना ज़रूरी है
अब्दुल ग़नी बट्ट

हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता प्रोफ़ेसर अब्दुल ग़नी बट्ट ने कहा कि उन्हें इस बात की आशा है कि उनके प्रतिनिधिमंडल को पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर से बाहर भी जाने दिया जाएगा.

उन्होंने कहा कि "शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाना महत्वपूर्ण है और इसके लिए यात्रा के नियमों में लचीलापन होना ज़रूरी है."

इससे पहले हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नेता मीर वायज़ उमर फ़ारूक़ ने घोषणा की थी कि वे एक चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे जो 2 जून को पाकिस्तान जाएगा.

हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के चार सदस्यीय दल में मीर वायज़ उमर फ़ारूक़ के अलावा, अब्दुल ग़नी बट्ट, मौलवी अब्बास अंसारी, बिलाल ग़नी लोन और फ़ज़ल उल कुरैशी होंगे.

जेकेएलएफ़

हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अलावा जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ़) के नेताओं के भी पाकिस्तान जाने की संभावना बढ़ गई है क्योंकि जेकेएलएफ़ ने पाकिस्तान के निमंत्रण को स्वीकार करने की घोषणा की है.

जेकेएलएफ़ के नेताओं ने भी निमंत्रण स्वीकार कर लिया है
जेकेएलएफ़ के नेताओं की बैठक

जेकेएलएफ़ के अध्यक्ष यासीन मलिक ने पत्रकारों को बताया कि यदि भारत और पाकिस्तान की सरकारों ने सभी नामों को स्वीकृति प्रदान कर दी तो वो 17 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे.

यासीन मलिक का कहना था कि उनकी पाकिस्तान यात्रा का मतलब यह नहीं है कि वो कश्मीर विवाद को हल करने के लिए बातचीत करने जा रहे हैं.

उनका कहना था कि दोनों पक्ष इस प्रक्रिया में कश्मीरी लोगों को शामिल करने का रास्ता तलाश करने की कोशिश करेंगे.

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