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हुर्रियत नेताओं से मिले मुशर्रफ़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ़ ने दिन भर भारतीय नेताओं से बात करने के बाद शाम को हुर्रियत कांफ़्रेंस के नेताओं से अलग-अलग मुलाक़ात की है. मुशर्रफ़ से मिलने वाले लोगों में हुर्रियत के एक धड़े के नेता सैयद अली शाह गिलानी, दूसरे धड़े के नेता मीर वाइज़ उमर फ़ारुख़ के अलावा हुर्रियत में शामिल जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ़्रंट के नेता यासीन मलिक शामिल हैं. इससे पहले परवेज़ मुशर्रफ़ ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात कर शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए बात की थी. इसके बाद वे राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी से भी मिले थे. हुर्रियत नेताओं की पाकिस्तान के राष्ट्राध्यक्ष से मुलाक़ात का सिलसिला तीन घंटों से भी अधिक समय तक चला. हालांकि ये नेता भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी मिलना चाहते थे लेकिन ये मुलाक़ात अभी तक नहीं हो सकी है. राष्ट्रपति मुशर्रफ़ से सबसे पहले मुलाक़ात हुई हुर्रियत के कट्टरपंथी माने जाने वाले धड़े के नेता सैयद अली शाह गिलानी की. गिलानी ने कहा कि उन्होंने परवेज़ मुशर्रफ़ से कहा है कि कश्मीर का मसला हल किए बिना विश्वास बहाली के जो भी कदम उठाए जा रहे हैं उनका कोई अर्थ नहीं है. इसके बाद मीर वाइज़ उमर फ़ारुक उनसे मिलने पहुँचे उनके साथ अब्दुल गनी बट थे. और फिर यासीन मलिक तथा शब्बीर शाह ने परवेज़ मुशर्रफ़ से मुलाक़ात की. 'कश्मीर की आज़ादी' की मांग कर रहे हुर्रियत के नेताओं का रुख पहले से स्पष्ट रहा है. यासीन मलिक अपने साथ वे सीडी साथ ले गए थे जिसमें पंद्रह लाख कश्मीरियों के हस्ताक्षर हैं. उनका कहना है कि ये हस्ताक्षर कश्मीरियों को अपनी राय ज़ाहिर करने की स्वतंत्रता देने के पक्ष में हैं. हुर्रियत के नेताओं ने भारत-पाकिस्तान द्वारा हाल ही में नियंत्रण रेखा के दोनों ओर के कश्मीर को जोड़ने वाली श्रीनगर-मुज़फ़्फ़राबाद बस सेवा का विरोध किया था. |
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