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'अब वापस लौटना संभव नहीं दिखता' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत और पाकिस्तान के पूर्व विदेश सचिवों का मानना है कि दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने की जो प्रक्रिया शुरु हुई है उससे पीछे हटना अब संभव नहीं दिखता. भारत के पूर्व विदेश सचिव शशांक और पाकिस्तान के पूर्व विदेश सचिव नियाज़ नाइक दोनों ने कहा कि इस समय दोनों देशों के बीच बातचीत का बहुत अच्छा माहौल है. 'आपकी बात बीबीसी के साथ' कार्यक्रम में श्रोताओं के सवालों के जवाब देते हुए दोनों ने माना कि कश्मीर मसले का हल आसान नहीं होगा. दोनों ही देशों के पूर्व विदेश सचिवों ने कहा कि दोनों देशों के नेता यदि एक दूसरे देश में आसानी से आना जाना कर रहे हैं तो इसका मलतब यह है कि माहौल बहुत अच्छा है और संकेत हैं कि बात आगे बढ़ेगी. इस सवाल पर कि जब दोनों देश अपने अपने रुख़ पर क़ायम हैं तो मसला हल कैसे होगा, भारत के पूर्व विदेश सचिव शशांक ने कहा कि बदलाव धीरे-धीरे आएगा, धैर्य रखना चाहिए और बातचीत जारी रखनी चाहिए. उनकी बात का समर्थन करते हुए कहा कि जिस तरह की बात चल रही है उससे लगता है कि राजनीतिक समझ बढ़ रही है.
एक और सवाल के जवाब में भारत के पूर्व विदेश सचिव शशांक ने स्वीकार किया कि यदि कश्मीर के मामले को एक इलाक़े की समस्या के बारे में देखा जाएगा तो एक दिन फिर बातचीत रुक जाएगी. नियाज़ नाइक ने भी कहा कि जब तक कश्मीर मसले का हल नहीं निकलेगा तब तक ख़तरा यही है कि शांति प्रक्रिया रुक जाएगी. दोनों पूर्व अधिकारियों ने माना कि 'मोस्ट फ़ेवर्ड नेशन' का दर्जा दिया जाना किसी समस्या का हल नहीं है और बात व्यापक व्यापार की होनी चाहिए. एक श्रोता ने पूछा कि ताशकंद, शिमला, लाहौर और आगरा के अनुभवों को देखें तो इस बार क्या अलग है, और इसके जवाब में पाकिस्तान के पूर्व विदेश सचिव नाइक ने कहा, "दोनों नेताओं के बॉडी लैंग्वेज से लगता है कि बात बन रही है और दोनों नेताओं की केमिस्ट्री मिल रही है." उन्होंने कहा कि अब लगता है कि कि सिर्फ़ हुकुमत ही नहीं अब आवाम की आवाज़ें भी मिल रही हैं. भारत के पूर्व विदेश सचिव शशांक ने कहा, "अब पूरी दुनिया की नज़रें इस पर लगी हुई हैं कि भारत और पाकिस्तान दोनों दुनिया को एक नई दिशा दें." शशांक ने कहा कि अब जो बात चल रही है उससे पीछे हटना मुश्किल होगा. नियाज़ नाइक का कहना था कि परवेज़ मुशर्रफ़ ख़ुद कह चुके हैं कि यह प्रक्रिया अब पलटी नहीं जा सकेगी. उनका कहना था कि कुछ लोग ज़रुर होंगे जो पीछे देखना चाहेंगे लेकिन ज़्य़ादातर लोग आगे देख रहे हैं. |
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