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समाधान धार्मिक आधार पर नहीं: मुशर्रफ़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा है कि कश्मीर समस्या का समाधान धार्मिक आधार पर नहीं किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि कश्मीर मसले का धार्मिक स्तर पर कोई समाधान नहीं हो सकता क्योंकि 'अपनी धर्मनिरपेक्ष छवि को लेकर भारत की संवेदनशीलता से हम भलीभांति परिचित हैं.' इस्लामाबाद से बीबीसी संवाददादा पॉल एंडरसन के अनुसार मुशर्रफ़ ने कहा कि भविष्य में कश्मीर का कोई भी विभाजन भौगोलिक आधार पर होना चाहिए, न कि धार्मिक आधार पर. उल्लेखनीय है कि अब तक वो धार्मिक आधार पर कश्मीर समस्या के समाधान के पक्ष में थे. उन्होंने कहा कि वह भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ मिलकर कश्मीर समस्या का समाधान करने में सक्षम हैं. उन्होंने मनमोहन सिंह के साथ अपने अच्छे संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा, "यदि शांति के प्रति हम सचमुच में गंभीर हैं, तो यह हम दोनों के बीच ज़्यादा संभव है. लेकिन इसके लिए अनंतकाल तक इंतज़ार नहीं किया जा सकता." व्यापक योजना दक्षिण एशिया संसदीय फ़ोरम के समापन सत्र में उन्होंने नियंत्रण रेखा का उल्लेख करते हुए कहा कि सीमाओं को अप्रासंगिक बनाकर ही दीर्घकालीन हल पाया जा सकता है. अपनी योजना को और स्पष्ट करते हुए मुशर्रफ़ ने कहा कि कश्मीर में चरमपंथी हमलों पर रोक के साथ ही वहाँ भारतीय सुरक्षा बलों की संख्या कम करने की भी ज़रूरत है. उन्होंने कश्मीरियों को उनकी आकांक्षा के अनुरूप अधिकतम स्वायत्तता देने की हिमायत की. मुशर्रफ़ ने कहा कि कश्मीर समस्या का कोई भी समाधान पाकिस्तान, भारत और कश्मीरियों को स्वीकार्य होना चाहिए. भारत अब तक कश्मीर मसले के समाधान की दिशा में बातचीत के लिए मुशर्रफ़ द्वारा पेश एजेंडा का यह कहते हुए विरोध करते रहा है कि न तो नियंत्रण रेखा की स्थिति बदली जा सकती है और न ही कश्मीर को नए ढंग से विभाजित किया जा सकता है. भारत पाकिस्तानी राष्ट्रपति मुशर्रफ़ पर दशकों पुरानी समस्या के समाधान की हड़बड़ी दिखाने का भी आरोप लगाता रहा है. हमारे संवाददाता के अनुसार इस बार मुशर्रफ़ उम्मीद कर रहे होंगे कि उनकी ताज़ा घोषणा पर भारत की सकारात्मक प्रतिक्रिया आएगी. |
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