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'क़ुरान के अपमान' पर विरोध प्रदर्शन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
क्यूबा के ग्वांतानामो बे में अमरीकी सैनिक अड्डे में 'क़ुरान के अपमान' के विरोध में भारत प्रशासित कश्मीर में शुक्रवार को बंद का आयोजन किया गया. इस मामले में पाकिस्तान में भी विरोध प्रदर्शन हुए हैं. पाकिस्तान के पेशावर में लगभग 300 महिला कार्यकर्ताओं और सांसदों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया. मुत्तहिदा मजलिसे अमल के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन का नेतृत्व किया. प्रदर्शनकारी क़ुरान की प्रतियाँ लिए हुए थे और उन्होंने 'क़ुरान के अपमान' की आलोचना की. भारत प्रशासित कश्मीर में बंद का आयोजन पृथकतावादी संगठन सर्वदलीय हुर्रियत कांफ़्रेंस के कट्टपंथी धड़े ने किया जिसका नेतृत्व सैयद अली शाह गिलानी करते हैं. विरोध प्रदर्शन के दौरान गिलानी को नज़रबंद कर दिया गया. भारत प्रशासित कश्मीर के ज़्यादातर हिस्सों में दुकानें बंद रहीं और सिर्फ़ इक्का-दुक्का निजी वाहनों को छोड़कर वाहन नहीं चले. विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों ने बांदीपुरा, उड़ी और चरारे-शरीफ़ में प्रदर्शन किया. श्रीनगर में महिला संगठन दुख्ताराने मिल्लत ने प्रदर्शन किया और अमरीकी झंडा जलाया. पुलिस ने संयुक्त राष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षकों के समक्ष प्रदर्शन करने वाले कई लोगों को गिरफ़्तार किया. विवाद इस विवाद की शुरूआत अमरीकी समाचार पत्रिका न्यूज़वीक में छपी ख़बर से हुई थी जिसमें कहा गया था कि ग्वांतानामो शिविर में गार्डों ने क़ुरान को शौचालय में बहाया था. इस समाचार के छपने के बाद दुनिया के कई देशों में विरोध प्रदर्शन हुए. अफ़ग़ानिस्तान में हुए विरोध प्रदर्शन के हिंसक होने जाने से लगभग 15 लोगों की मौत हो गई थी. भारी विवाद के बाद पत्रिका ने यह कहते हुए अपनी ख़बर वापस ले ली थी कि वह इसे साबित नहीं कर सकती. इस तरह के आरोपों के बाद हर रोज़ नई जानकारियाँ सामने आने से अमरीका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफ़ी सवालों का सामना करना पड़ रहा है. |
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