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'क़ुरान के अपमान की पाँच घटनाएँ हुई' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी सेना का कहना है कि उसे पाँच ऐसी घटनाओं का पता चला है जब ग्वांतानामो बे बंदी शिविर में अमरीकी सैनिकों ने क़ुरान का अपमान किया. लेकिन ग्वांतानामो बे बंदी शिविर के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल जे हुड का कहना है कि किसी भी मामले में गार्डों ने उन निर्देशों की अवहेलना नहीं की है जो उस समय उन्हें दिए गए थे. ब्रिगेडियर जनरल हुड का कहना है कि इन मामलों का पूरा विवरण जाँच समाप्त होने के बाद ही जारी किया जाएगा लेकिन उन्होंने इतना ज़रूर कहा कि क़ुरान को शौचालय में बहाए जाने का एक क़ैदी का आरोप सही नहीं है. अमरीकी रक्षा मंत्रालय पेंटागॉन कहता रहा है कि ग्वांतानामो शिविर में मुसलमान कैदियों की धार्मिक संवेदनाओं का सम्मान किया जाता है लेकिन ब्रिगेडियर जनरल हुड की इस स्वीकारोक्ति से अमरीकी प्रशासन की स्थिति मुश्किल हो गई है. पेंटागॉन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ब्रिगेडियर जनरल हुड ने कहा कि चार मामलों में गार्डों ने कुरान के साथ 'सही सुलूक नहीं किया,' जबकि एक मामले में एक जाँच अधिकारी ने ऐसा किया. अमरीकी सेना के इस वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि इन घटनाओं की शुरूआत वर्ष 2001 के अंतिम दिनों से ही हो गई थी. उनका कहना है कि "कुछ मामलों में सैनिकों ने जान-बूझकर कुरान का अपमान किया लेकिन उन्हें जो निर्देश दिए गए थे उनमें से किसी का उल्लंघन उन्होंने नहीं किया है." पेंटागॉन के प्रवक्ता लैरी डि रिटा ने इन घटनाओं को "मुसलमानों की पवित्र पुस्तक के बारे में सैनिकों की लापरवाही" की संज्ञा दी. ग्वांतानामो बे बंदी शिविर में क़ुरान के साथ कैसा सुलूक किया जाता है, यह सवाल अब एक बहुत ही संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बन गया है. शुरूआत इस विवाद की शुरूआत अमरीकी समाचार पत्रिका न्यूज़वीक में छपी ख़बर से हुई थी जिसमें कहा गया था कि ग्वांतानामो शिविर में गार्डों ने क़ुरान को शौचालय में बहाया था.
इस समाचार के छपने के बाद दुनिया के कई देशों में विरोध प्रदर्शन हुए, अफ़ग़ानिस्तान में हुए विरोध प्रदर्शन के हिंसक होने जाने से लगभग 15 लोगों की मौत हो गई. भारी विवाद के बीच पत्रिका ने यह कहते हुए अपनी ख़बर वापस ले ली वह इसे साबित नहीं कर सकती, लेकिन बुधवार को एक अमरीकी मानवाधिकार संगठन को मिले दस्तावेज़ से पता चला कि एक क़ैदी ने तीन वर्ष पहले वाक़ई ऐसी शिकायत की थी. मानवाधिकार संगठन अमरीकन सिविल लिबर्टीज़ यूनियन की माँग पर अमरीका की जाँच एजेंसी एफ़बीआई ने ये दस्तावेज़ सौंपे थे जिनमें स्वीकार किया गया था कि क़ुरान को शौचालय में बहाए जाने का आरोप एक बंदी ने लगाया था. ग्वांतानामो बे बंदी शिविर के मुख्य कमांडर का कहना है कि इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि ऐसी घटना हुई थी और जिस क़ैदी ने ऐसे आरोप लगाए थे उसने बाद में अपना बयान बदल लिया था. इस तरह के आरोपों के बाद हर रोज़ नई जानकारियाँ सामने आने से अमरीका को अंतरराष्ट्रीय स्तर काफ़ी सवालों का सामना करना पड़ रहा है. मिसाल के तौर पर, पाकिस्तान की यात्रा पर गईं अमरीकी विदेश मंत्री क्रिस्टीना रोका से पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा कि ग्वांतानामो बे बंदी शिविर में क़ुरान के अपमान की कथित घटनाओं को लेकर पाकिस्तान की जनता में बहुत रोष है और इस घटना की पूरी जाँच कराई जानी चाहिए. |
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