| यासीन मलिक भी पाकिस्तान जाएँगे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत प्रशासित कश्मीर के अलगाववादी संगठन जम्मू- कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ़) ने घोषणा की है कि उसने पाकिस्तान का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है. पाकिस्तान ने दो जून को बस से उन्हें पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर आने का न्योता दिया था. जेकेएलएफ़ के अध्यक्ष यासीन मलिक ने पत्रकारों को बताया कि यदि भारत और पाकिस्तान की सरकारों ने सभी नामों को स्वीकृति प्रदान कर दी तो वो 17 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे. यासीन मलिक का कहना था कि उनकी पाकिस्तान यात्रा का मतलब यह नहीं है कि वो कश्मीर विवाद को हल करने के लिए बातचीत करने जा रहे हैं. उनका कहना था कि दोनों पक्ष इस प्रक्रिया में कश्मीरी लोगों को शामिल करने का रास्ता तलाश करने की कोशिश करेंगे. इसके पहले हुर्रियत कांफ़्रेंस का मीरवाइज़ उमर फ़ारुख़ नेतृत्ववाला धड़ा पाकिस्तान जाने पर सहमत हो गया था. मीरवाइज़ उमर फ़ारुख़ का कहना था कि यह यात्रा भारत, पाकिस्तान और कश्मीरी लोगों के बीच त्रिपक्षीय वार्ता की शुरुआत है. उन्होंने कहा है कि वह दो जून को चार सदस्यों वाले एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे जिसमें प्रोफ़ेसर अब्दुल ग़नी बट्ट, मौलवी अब्बास अंसारी, बिलाल ग़नी लोन और फ़ज़लुल क़ुरैशी शामिल होंगे. हुर्रियत का सैयद अली शाह गिलानी के नेतृत्ववाले कट्टरपंथी धड़े ने अभी तक पाकिस्तान के निमंत्रण पर कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है. ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ़ ने अपनी भारत यात्रा के दौरान हुर्रियत कांफ़्रेंस के नेताओं से अलग-अलग मुलाक़ात की थी. मुशर्रफ़ से मिलने वाले लोगों में हुर्रियत के एक धड़े के नेता सैयद अली शाह गिलानी, दूसरे धड़े के नेता मीर वाइज़ उमर फ़ारुख़ के अलावा हुर्रियत में शामिल जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ़्रंट के नेता यासीन मलिक शामिल थे. हुर्रियत के नेताओं ने भारत-पाकिस्तान द्वारा हाल ही में नियंत्रण रेखा के दोनों ओर के कश्मीर को जोड़ने वाली श्रीनगर-मुज़फ़्फ़राबाद बस सेवा का विरोध किया था. |
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