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अमरीका से कार्रवाई करने की अपील | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख़ुर्शीद महमूद कसूरी ने कहा है कि अगर ग्वांतानामो सैनिक अड्डे पर अमरीकी सैनिकों ने क़ुरान का अपमान किया है, तो उन्हें कड़ा दंड दिया जाना चाहिए. कसूरी ने कहा कि इस तरह की रिपोर्ट आने के बाद इस्लामी जगत में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. शुक्रवार को पाकिस्तान में भी इसके ख़िलाफ़ प्रदर्शन हुए. छह धार्मिक पार्टियों के गठबंधन मुत्तहिदा मजलिस-ए-अमल (एमएमए) ने इसका आह्वान किया था. एमएमए ने अमरीका से कहा है कि वह इस मामले में बिना शर्त माफ़ी मांगे अन्यथा उसके ख़िलाफ़ और प्रदर्शन होंगे. लेकिन अफ़ग़ानिस्तान में हुए हिंसात्मक प्रदर्शन से अलग पाकिस्तान में प्रदर्शन अपेक्षाकृत शांत रहे. इस सप्ताह अफ़ग़ानिस्तान में हुए प्रदर्शनों में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई थी. दूसरी ओर अमरीका की विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने मुसलमानों से अपील की है कि वे शांति से काम करें और वादा किया कि अमरीका इस मामले की जाँच कर रहा है. उन्होंने कहा कि इस्लाम का अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता. प्रदर्शन इस्मालाबाद में शुक्रवार की नमाज़ के बाद एमएमए के सैकड़ो सदस्य सड़क पर उतर आए और उन्होंने अमरीका विरोधी नारे लगाए.
लोगों ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ भी नारेबाज़ी की. प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए एमएमए के एक वरिष्ठ नेता हाफ़िज़ हुसैन अहमद ने अमरीका पर आरोप लगाया कि वह मुस्लिमों और इस्लाम का अपमान कर रहा है. उन्होंने कहा कि क़ुरान का अपमान एक गंभीर विषय है और इसे इतनी आसानी से अलग नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि अमरीका इस विषय की गंभीरता को समझे और बिना देरी के मुसलमानों से माफ़ी मांगे. हुसैन अहमद ने कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो उनका गठबंधन अमरीकी राजदूत को वापस भेजने की मांग करेगा. इस्लामाबाद के अलावा पाकिस्तान के अन्य शहरों में भी विरोध प्रदर्शन हुए. इससे पहले पाकिस्तान के कई सांसदों ने इस पर संसद में बहस कराने की मांग की. |
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