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बिहार में बाढ़ राहत राशि में 'घोटाला' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बिहार सरकार ने 2004 में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित लोगों के बीच राहत सामग्री के वितरण में 17 करोड़ रुपए के कथित घपले की जाँच के आदेश दिए हैं. सरकार का कहना है कि उसे पता चला है कि बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए जो राशि दी गई उसका अधिकांश हिस्सा एक ऐसी कंपनी के खाते में जमा कर दिया गया जिसका बाढ़ राहत से कोई लेना देना नहीं था. इस घोटाले में बतौर मुख्य अभियुक्त पटना के तत्कालीन ज़िलाधिकारी गौतम गोस्वामी शक के दायरे में आ रहे हैं, जिन्हें अमरीकी पत्रिका “टाइम” ने “यंग हीरो” के रूप में चुना था. बीबीसी से एक विशेष बातचीत में गौतम गोस्वामी ने आरोपों को ग़लत बताया है और कहा है कि उन्होंने सारा काम वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी में किया. घोटाला जुलाई-अगस्त, 2004 में बिहार की लगभग आधी आबादी पर कहर बरपाने वाली भीषण बाढ़ से पीड़ित लोगों तक राहत-सामग्री पहुँचाने के काम में जुटे सरकारी तंत्र की कमान पटना के तत्कालीन ज़िलाधिकारी गौतम गोस्वामी को सौंप दी गई थी.
राज्य भर में कहाँ और कितनी मात्रा में कितने मूल्यों की राहत सामग्री की आपूर्ति कौन कर रहा था, इसका पूरा लेखा-जोखा गौतम गोस्वामी के नियंत्रण में था. और अब पता चला है कि इसमें लगभग 17 करोड़ रुपए का घोटाला हो गया है. जो तथ्य सामने आ रहे हैं उनसे ज़ाहिर है कि इस घपले में बीके सिंह नामक जिस व्यक्ति की सबसे मुख्य भूमिका रही, उसे राज्य सरकार के संबंधित विभागों या अधिकारियों का जाने-अनजाने सहयोग, संरक्षण प्राप्त था. संक्षेप में इस कथित घोटाले का क़िस्सा ये कि जुलाई, 2004 में तत्कालीन राबड़ी देवी सरकार ने बाढ़ राहत मद में 13 करोड़ रुपए दिए. इस रक़म में रेल ज़मीन अधिग्रहण और शिक्षा-स्कॉलरशिप मद के लगभग साढ़े चार करोड़ रुपए और जोड़े गए जो कुल 17 करोड़ पैंतालिस लाख़ रुपए हुए. तत्कालीन ज़िलाधिकारी गौतम गोस्वामी ने बीएसएसआईडीसी यानी “बिहार स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज़ कॉरपोरेशन” नाम की सरकारी संस्था को बाढ़ राहत सामग्री आपूर्ति करने के एवज़ में इस राशि का भुगतान विभिन्न चेकों के ज़रिए किया. ख़ुद को इसी बीएसएसआईडीसी का कर्मचारी या प्रतिनिधि बताकर बीके सिंह नाम का व्यक्ति गौतम गोस्वामी को सामानों की आपूर्ति से संबंधित बिल देता था और बदले में ज़िलाधिकारी गौतम से चेक प्राप्त कर लेता था. अब पता चल रहा है कि बीएसएसआईडीसी में बीके सिंह नाम का कोई कर्मचारी है ही नहीं. बीएसएसआईडीसी के प्रबंध निदेशक ने बताया कि उनकी संस्था (लघु उद्योग निगम) ने सिर्फ़ 22 लाख़ रुपए की राहत सामग्री सप्लाई की थी, जिसमें 13 लाख़ रुपए का भुगतान हो चुका है और नौ लाख रुपए अभी भी बाक़ी हैं. जाँच अब यह भी रहस्य खुला है कि बीके सिंह बीएसएसआई यानी “बिहार सत्य साईं इंडस्ट्रीज़” नाम की संस्था के बैंक खाते में सारी रक़म डालता रहा.
इस बाबत अख़बारों में जब ख़बरें छपने लगीं तो राज्यपाल सरदार बूटा सिंह के विशेष सलाहकार और राबड़ी सरकार के समय से ही मुख्य सचिव का पद संभाल चुके कृष्ण अर्जुन हरिहर सुब्रह्मण्यम ने पत्रकारों को बताया कि गौतम गोस्वामी से जुड़े इस मामले की जाँच सतर्कता विभाग से कराने का आदेश उन्होंने एक माह पहले ही दे दिया था. मुख्य सचिव सीधे तौर पर अभी इसे घोटाला मानने से बचते हुए सिर्फ़ ये कहते हैं कि गौतम गोस्वामी ने जो “फंड-ट्रांसफ़र” किए वो ग़लत था और सतर्कता से अनापत्ति यानी “नो आब्जेक्शन” सर्टिफिकेट मिले बिना गोस्वामी का दिया हुआ इस्तीफ़ा भी मंज़ूर नहीं होगा. ग़ौरतलब है कि गौतम गोस्वामी भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफ़ा देकर “सहारा ग्रुप” में उपाध्यक्ष पद पर चले गए हैं और अब प्रशासन कह रहा है कि इस्तीफ़ा मंज़ूर हुए बिना दूसरी नौकरी करना भी असंवैधानिक हो सकता है. मुख्य सचिव के मुताबिक सतर्कता विभाग की जाँच रिपोर्ट में यदि गोस्वामी या कोई भी दोषी पाया गया तो सख़्त कार्रवाई होगी. गौतम गोस्वामी को अमरीकी पत्रिका “टाइम” ने हाल ही 20 “एशियाई युवा नायकों” की सूची में स्थान दिया था, जिसमें फ़िल्म अभिनेता शाहरूख़ ख़ान का भी नाम शामिल था. |
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