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बाढ़ पीड़ितों को पूरी मदद का वायदा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बिहार के बाढ़ पीड़ित इलाकों का दौरा करने के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने केंद्र सरकार की ओर से भरपूर मदद का आश्वासन दिया है. बाढ़ को विनाशकारी और भयावह बताते हुए उन्होंने कहा है कि बाढ़ पीड़ितों को भूखा नहीं रहने दिया जाएगा. हालांकि बिहार सरकार की ओर से 7,200 करोड़ के नुक़सान का ज्ञापन दिया गया था लेकिन उन्होंने फ़िलहाल केंद्रीय सहायता की कोई घोषणा नहीं की है. मंगलवार की सुबह पटना पहुँचे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बाढ़ पीड़ित 19 ज़िलों में से चार ज़िलों, बेगुसराय, दरभंगा, खगड़िया और समस्तीपुर का हवाई सर्वेक्षण किया. इन्हीं चार ज़िलों में बाढ़ का पानी अभी भी उतरा नहीं है. केंद्रीय दल हवाई सर्वेक्षण के बाद उन्होंने राज्य के अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की और उसके बाद वे विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिमंडलों से मिले. इसके बाद एक पत्रकारवार्ता में उन्होंने कहा कि जिन ज़िलों का उन्होंने सर्वेक्षण किया वहाँ उन्होंने देखा कि बड़ी संख्या में मकान गिर गए हैं और लोग मुसीबत में हैं. उन्होंने बाढ़ को विनाशकारी बताया. बिहार सरकार के आर्थिक सहायता के ज्ञापन का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्रीय सहायता के लिए कुछ नियमों का पालन करना होता है. उन्होंने कहा कि तीन अगस्त को केंद्र से अधिकारियों का एक दल बाढ़ पीड़ित इलाकों का जायज़ा लेने के लिए बिहार आएगा और उनके आकलन के बाद केंद्रीय सहायता की घोषणा की जाएगी. उन्होंने बताया कि अब तक केंद्रीय आपदा राहत कोष से बिहार की बाढ़ के लिए 115 करोड़ रुपए की राशि दी जा चुकी है. नेपाल प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पत्रवार्ता में कहा कि बिहार में बाढ़ रोकने के लिए नेपाल की सप्तकोशी नदी पर बाँध बनाए जाने की ज़ररुत है. उन्होंने बताया कि इस पर बातचीत शुरु हो गई है और इस बार बजट में 29 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. उन्होंने बिहार की नदियों की पानी निकासी व्यवस्था यानी ड्रेनेज को ख़राब बताते हुए कहा कि गंडक, बागमति और कमला नदियों पर काम करने की ज़रुरत है. राज्य की मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के अलावा केंद्रीय मंत्रियों लालू प्रसाद यादव, रामविलास पासवान, रघुवंश प्रसाद सिंह आदि प्रधानमंत्री के साथ मौजूद थे. |
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