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नेपाल की नदियों पर बाँध की ज़रूरत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के जलसंसाधन राज्य मंत्री जयप्रकाश नारायण यादव ने कहा है कि सप्तकोसी नदी परियोजना के लिए नेपाल सरकार सहमत हो गई है. बीबीसी हिंदी सेवा के कार्यक्रम आपकी बात बीबीसी के साथ में सवालों के जवाब देते हुए उन्होंने बिहार में बाढ़ के कहर के लिए केंद्र की पूर्ववर्ती राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार को दोष दिया. यादव ने कहा, "बिहार की मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के नेतृत्व में एक सर्वदलीय शिष्टमंडल ने 2002 में तत्कालीन केंद्र सरकार से सप्तकोसी बहुद्देशीय परियोजना के बारे में नेपाल के साथ बातचीत का आग्रह किया था, लेकिन केंद्र सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की." उन्होंने कहा, "सत्ता में आने के महीने भर के भीतर केंद्र की मौजूदा यूपीए सरकार ने नेपाल के साथ बातचीत की खिड़की खोल दी. नेपाल सरकार ने सूचित किया है कि सप्तकोसी बाँध के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाए. केंद्र सरकार ने इसके लिए 30 करोड़ रुपये आवंटित भी कर दिए हैं." यादव ने कहा कि विस्तृत परियोजना रिपोर्ट ढाई साल में तैयार कर ली जाएगी. उन्होंने कहा कि बिहार को बाढ़ की विभीषिका से बचाने के लि मौजूदा केंद्र सरकार कोसी के अलावा कमला और बागमती नदियों पर भी बाँध बनाने के लिए नेपाल के साथ बातचीत करेगी. उन्होंने कहा कि बिहार में बाढ़ की स्थिति के लिए किसी देश, ख़ास कर नेपाल जैसे मित्र देश पर आरोप लगाने से काम नहीं चलेगा, 'लेकिन यह सच्चाई है कि नेपाल में भारी बारिश का बिहार पर बुरा असर पड़ता है.' |
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