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कम नहीं हो रहा है बाढ़ का क़हर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय राज्यों बिहार और असम के साथ ही बांग्लादेश और नेपाल में भी आई बाढ़ का क़हर कम होता नहीं दिख रहा है. इस बीच अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि बाढ़ की वजह से कुछ बीमारियाँ फैल सकती हैं. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष यूनीसेफ़ का कहना है कि बीमारियाँ फैलने से रोकने के लिए कार्रवाई करने की ज़रूरत है. बिहार में उत्तरी हिस्सा ज़बरदस्त तरीक़े से प्रभावित है और मुज़फ़्फ़रपुर, समस्तीपुर, दरभंगा, सहरसा ज़िलों से बाक़ी राज्य का रेलसंपर्क ख़त्म हो चुका है. उधर बांग्लादेश में मध्यवर्ती इलाक़ों में बाढ़ की समस्या बढ़ती ही जा रही है. असम में मुख्यमंत्री तरुण गोगोई का कहना है कि राहत आपूर्ति तुरंत पहुँचाने की ज़रूरत है. इस पूरे क्षेत्र में बाँध की वजह से लाखों लोग प्रभावित हुए हैं. मारे गए लोगों की संख्या सैकड़ों में है मगर मारे जाने वालों की निश्चित संख्या बता पाना संभव नहीं हो पा रहा है. इस बीच बिहार में सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई जिसमें भारतीय जनता पार्टी, जनता दल यूनाइटेड और वामपंथी दलों के नेताओं के साथ ही सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष के नाते लालू प्रसाद यादव भी शामिल हुए.
बैठक के बाद यादव ने कहा कि एक सर्वदलीय समिति बनाने का प्रस्ताव है, हालाँकि विपक्ष के नेता उपेंद्र प्रसाद कुशवाहा का कहना है कि सरकार इस समिति के ज़रिए अपनी विफलता छिपाने की कोशिश कर रही है इसलिए वह इस समिति में शामिल नहीं होंगे. राज्य में कई बाँध टूट चुके हैं. लगभग पौने दो करोड़ लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. बांग्लादेश में बाढ़ की चेतावनी देने वाले अधिकारियों का कहना है कि देश के उत्तर से आ रहे पानी की वजह से मध्यवर्ती इलाक़ों में स्थिति बिगड़ती जा रही है. आने वाले दिनों में राजधानी ढाका के इर्दगिर्द के कई क्षेत्र इसका शिकार हो सकते हैं. बांग्लादेश के 64 में से 33 ज़िले बाढ़ से प्रभावित हैं और लगभग 30 लाख लोगों को घर छोड़ना पड़ा है. असम में अधिकारियों के अनुसार लगभग 90 लाख लोग इस बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. |
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