|
भारत के तटवर्ती इलाक़ों में दहशत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सूनामी के ख़तरे की ख़बर फैलते ही भारत के तटवर्ती इलाक़ों में दहशत फैल गई. तमिलनाडु के तटवर्ती इलाक़ों में रहनेवाले मछुआरे अपने घरों को छोड़कर सड़कों पर आ गए. पीटीआई संवाददाता ने चैन्नई के मरीना बीच का दौरा किया और पाया कि लोग समुद्र तट से दूर ऊंचे स्थानों और सड़कों पर रात बिता रहे हैं. पुलिस ने भी समुद्रतट जानेवाले कुछ रास्तों पर अवरोध खड़े कर दिए थे. ख़बरों के अनुसार महाबलीपुरम से लोगों को हटाकर निकट के गाँवों में पहुँचा दिया गया है. यहाँ लोग अपने वाहनों पर सुरक्षित स्थानों पर जाते देखे गए. पीटीआई के अनुसार कांचीपुरम ज़िले में अलर्ट घोषित कर दिया गया था लेकिन कलपक्कम में कोई भगदड़ नहीं थी. 26 दिसंबर को आए सूनामी में कलपक्कम ताप बिजलीघर को ख़ासा नुक़सान पहुँचा था. संयम की सलाह केरल के मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने लोगों से कहा कि आतंकित होने की आवश्यकता नहीं है. सरकार ने किसी भी ख़तरे से निपटने के इंतज़ाम कर लिए हैं. केरल सरकार ने सभी मछुआरों से वापस लौटने और समुद्र में मछली पकड़ने न जाने की सलाह दी है. सरकार ने तटवर्ती स्थान पर रहनेवाले लोगों से अपने घर छोड़ने को तो नहीं कहा लेकिन बड़ी संख्या में लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं. इंडोनेशिया में सोमवार रात आए भूकंप के बाद जिन देशों में तत्काल लोग सतर्क हुए उनमें भारत भी था. भारत सरकार ने इंडोनेशिया के भूकंप के बाद अंडमान निकोबार, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पांडिचेरी, केरल, कर्नाटक और लक्षद्वीप में चेतावनी जारी की थी. लेकिन बाद में ये चेतावनी वापस ले ली गई है. लेकिन इन क्षेत्रों में प्रशासन को सतर्क रहने के लिए कहा गया है और साथ ही तटवर्ती इलाक़ों में मछुआरों को समुद्र से दूर रहने की सलाह दी गई है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||