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अविश्वास प्रस्ताव की संभावना कम | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने संकेत दिए हैं कि वह लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव का अपना विचार बदल सकता है. इससे पहले एनडीए लोकसभा अध्यक्ष के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारियों में लगा था. केंद्र की गठबंधन सरकार ने झारखंड में जो राजनीतिक क़दम उठाए हैं उससे चलते ही एनडीए का रुख़ नरम पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है. यह विवाद तब शुरु हुआ था जब भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने झारखंड में विश्वास प्रस्ताव को लेकर एक आदेश दिया और विधानसभा की कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग अदालत में जमा करने के आदेश दिए. इस आदेश को लेकर लोकसभा में हंगामा हुआ और लोकसभा अध्यक्ष ने एक सर्वदलीय बैठक बुलवाई और एक बयान जारी किया था. इस बैठक के बाद कहा गया था कि यह मामला राष्ट्रपति के पास भेज दिया जाए और उनसे अनुरोध किया जाए कि वे विधायिका और न्यायपालिका के दायरों को लेकर वे सर्वोच्च न्यायालय की राय मांगें. इस बैठक का भाजपा ने बहिष्कार किया था, हालांकि एनडीए के दूसरे दल इस बैठक में थे. लेकिन यूपीए सरकार ने मंत्रिमंडल की बैठक की तो वे इस मामले को टाल गए और सरकार की ओर से विधि मंत्री हंसराज भारद्वाज ने कहा कि सरकार न्यायपालिका से कोई विवाद नहीं चाहते. झारखंड में एनडीए की सरकार न बन पाने से नाराज़ भाजपा के नेताओं को लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी का रवैया नागवार गुज़रा और उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव लाने की योजना बनाई थी. लेकिन इस बीच केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति को इस मामले को भेजने का निर्णय नहीं लिया और दूसरी ओर झारखंड के प्रोटेम स्पीकर ने जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी की उसे गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार ने झारखंड में शिबू सोरेन को इस्तीफ़ा देने को कहा और एनडीए को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया. अब झारखंड में एनडीए की सरकार बन गई है और एनडीए नेताओं का रुख़ नरम पड़ता जा रहा है. भाजपा के प्रवक्ता मुख़्तार अब्बास नक़वी के हवाले से समाचार एजेंसियों ने कहा है कि अब एनडीए लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव का विचार त्याग सकती है. हालांकि, जैसा कि उन्होंने बताया, इस बारे में आख़िरी फ़ैसला सोमवार को होगा. उधर कांग्रेस नेता और यूपीए सरकार के संसदीय कार्यमंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा है कि सोमनाथ चटर्जी सबसे अनुभवी और पढ़े लिखे लोकसभा अध्यक्षों में से हैं और उनके ख़िलाफ़ अविश्वास का कोई कारण नज़र नहीं आता. |
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