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मुख्यमंत्री बने मुंडा, निर्दलियों को मंत्रिपद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एनडीए नेता अर्जुन मुंडा एक बार फिर झारखंड के मुख्यमंत्री बन गए हैं. शनिवार को रांची में राज्यपाल सैयद सिब्ते रज़ी ने उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई है. मुंडा के साथ उन पाँच निर्दलीय विधायकों ने भी मंत्रिपद की शपथ ली जिनके समर्थन के बाद ही सरकार बन सकी है. अर्जुन मुंडा ने उम्मीद जताई है कि वे 21 मार्च तक सदन में बहुमत साबित कर देंगे. रांची में मुंडा के शपथ ग्रहण के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष एल के आडवाणी और एनडीए समन्वयक जॉर्ज फ़र्नांडिस भी मौजूद थे. जिन निर्दलीय विधायकों को मंत्रिपद की शपथ दिलवाई गई उनके नाम हैं - सुदेश महतो, चंद्रप्रकाश चौधरी, एनोस एक्का, मधु कोड़ा और हरिनारायण राय. दावा
शुक्रवार को यूपीए गठबंधन के नेता शिबू सोरेन के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देने के बाद राज्यपाल ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था. राज्यपाल ने उन्हें बहुमत साबित करने के लिए दस दिन का समय दिया है यानी उन्हें 21 मार्च तक बहुमत साबित करना है. बीबीसी से विशेष बातचीत में अर्जुन मुंडा ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि वे नियत समय सीमा के भीतर बहुमत साबित कर देंगे. मुंडा ने एनडीए को सरकार बनाने का न्यौता दिए जाने को 'लोकतंत्र की जीत' बताया. 37 वर्षीय मुंडा दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं. उन्होंने 2001 में बिहार से अलग होकर बने राज्य झारखंड के पहले मुख्यमंत्री और अपनी ही पार्टी के नेता बाबूलाल मरांडी के बाद एनडीए सरकार का नेतृत्व सँभाला था. समीकरण झारखंड में विधानसभा में कुल 81 सीटें हैं और बहुमत के लिए कम से कम 41 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता है. एनडीए ने फ़रवरी में हुए चुनाव में कुल 36 सीटें हासिल की हैं और फिर पाँच निर्दलीय विधायकों के समर्थन से सरकार बनाने का दावा किया. मगर झारखंड में अभी तक जो राजनीतिक दाँव-पेंच नज़र आए हैं उसमें लेकिन विधानसभा में शक्ति परीक्षण से पहले तक विधायकों की जोड़-तोड़, छीना-झपटी का ड्रामा जारी रहेगा. ज़ाहिर है, एक विधायक के भी इधर से उधर होने पर सरकार के भविष्य पर ख़तरा मँडरा सकता है. |
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