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ग्यारह को ही बहुमत साबित करना होगा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर को निर्देश दिया है कि मुख्यमंत्री शिबू सोरेन 11 मार्च को विश्वास मत हासिल करें. राज्यपाल ने सोरेन को अपना बहुमत साबित करने के लिए 15 मार्च तक का समय दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इसके पहले नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलवा दी जाए. अदालत ने विधानसभा की कार्यवाही के संबंध में 14 मार्च तक रिपोर्ट पेश करने को कहा है. इस दिन अदालत में इसकी सुनवाई होनी है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने विश्वास मत तक एंग्लो इंडियन विधायक के मनोनयन पर भी रोक लगा दी है. झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता शिबू सोरेन को राज्य का मुख्यमंत्री बनाने के राज्यपाल के फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. मुंडा ने सोमवार को राज्यपाल सैयद सिब्ते रज़ी के फ़ैसले के ख़िलाफ़ याचिका दायर की थी. मुंडा ने अपनी याचिका में कहा है कि सोरेन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने का राज्यपाल का फैसला असंवैधानिक है. खींचतान झारखंड में पिछले महीने हुए चुनाव के बाद ही राजनीतिक सरगर्मी जारी है. किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था और बहुमत कुछेक विधायकों के समर्थन पर निर्भर कर रहा था. ऐसे में राज्यपाल ने कांग्रेस और झामुमो गठबंधन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर दिया. राज्यपाल का यह फ़ैसला इतना विवादित रहा कि राष्ट्रपति ने झारखंड के राज्यपाल को दिल्ली तलब कर विचार विमर्श किया था. राज्यपाल ने सोरेन को अपना बहुमत साबित करने के लिए 15 मार्च तक का समय दिया था. नवनिर्वाचित विधानसभा का पहला सत्र 10 मार्च से बुलाया गया है जो 15 मार्च तक चलना है. इसी सत्र में शिबू सोरेन को अपनी सरकार का बहुमत साबित करना है और इसी सत्र में नए सदस्यों को शपथ दिलाई जानी है. प्रोटेम स्पीकर ही सदस्यों को शपथ दिलवाएँगे और विश्वास मत पर चर्चा के बाद मतदान करवाएँगे. |
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