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झारखंड में सरकार का मसला उलझा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
झारखंड में सरकार बनाने का मामला उलझ गया है. राज्यपाल सैयद सिब्ते रज़ी एनडीए के सरकार बनाने के दावे से संतुष्ट नहीं हैं और उन्होंने बुधवार को सभी 12 निर्दलीय विधायकों को बातचीत के लिए बुलाया है. इसके पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने राज्यपाल को सरकार बनाने का दावा पेश किया था. इसके पहले राज्यपाल ने कहा कि वे किसी भी गठबंधन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने का फ़ैसला सभी निर्दलीय विधायकों से मुलाक़ात के बाद ही करेंगे. उनका कहना था,'' मेरी ज़िम्मेदारी है कि हक़ीकत का पता लगाऊं और पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही उस पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करूं जो सदन में बहुमत साबित कर सके.'' दूसरी ओर सरकार बनाने के लिए आमंत्रित न किए जाने के विरोध में एनडीए नेता राजभवन के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं. भाजपा के झारखंड के प्रभारी राजनाथ सिंह ने पत्रकारों से कहा कि यह धरना तब तक जारी रहेगा जब तक राज्यपाल एनडीए नेता अर्जुन मुंडा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं करते हैं. एनडीए का दावा एनडीए नेताओं ने मंगलवार को राँची में राज्यपाल सैयद सिब्ते रज़ी को 41 विधायकों के समर्थन की सूची सौंपी थी. एनडीए के घटक जनता दल यूनाइटेड के प्रदेश अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी ने बताया कि इनमें से 36 विधायक एनडीए के हैं जबकि पाँच नाम निर्दलीय विधायकों के हैं. राज्यपाल से मिलने के बाद उन्होंने पत्रकारों से कहा,"81 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 41 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता थी और हमने महामहिम राज्यपाल को ये सूची सौंप दी है". राज्यपाल से मिलने के लिए गए दल में पाँचों निर्दलीय विधायक भी शामिल थे. भाजपा विधायक दल ने अर्जुन मुंडा को अपना नेता चुना है. |
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