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अब सोरेन को बहुमत के लिए कम दिन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
झारखंड के राज्यपाल सैयद सिब्ते रज़ी ने शुक्रवार को राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से मुलाक़ात के बाद कहा कि वह झारखंड के नवनियुक्त मुख्यमंत्री को तय तिथि से पहले ही बहुमत साबित करना होगा. उन्होंने कहा कि पहले जो तारीख़ बहुमत साबित करने के लिए तय की गई थी उसे बदलकर समय पूर्व की कोई तारीख़ तय की जाएगी. उन्होंने नई तारीख़ की घोषणा अभी नहीं की है. ग़ौरतलब है कि शिबू सोरेन को जब इसी सप्ताह मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई थी तो उन्हें विधान सभा में बहुमत साबित करने के लिए 21 मार्च तक का समय दिया गया था. राष्ट्रपति कलाम ने राज्यपाल सिब्ते रज़ी को झारखंड की राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा के लिए दिल्ली बुलाया था. शुक्रवार को राष्ट्रपति से मुलाक़ात के बाद राज्यपाल सिब्ते रज़ी ने कहा कि उन्हें कई पक्षों से बातचीत करनी होगी, जिसके बाद वह नई तारीख़ तय करेंगे. यह पूछे जाने पर कि राष्ट्रपति से उनकी क्या चर्चा हुई है, उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति और राज्यपाल के बीच हुई बातचीत को सार्वजनिक करने की परंपरा नहीं रही है इसलिए इसे ज़ाहिर करना ठीक नहीं होगा." लोकतंत्र की हत्या के आरोपों के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "मैंने तो आज तक गुलेल से चिड़िया तक नहीं मारी, फिर संविधान की हत्या तो दूर की बात है." विवाद उल्लेखनीय है कि राज्यपाल सिब्ते रज़ी ने जब यूपीए गठबंधन के नेता के रूप में शिबू सोरेन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था तब से ही राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. एनडीए ने पाँच निर्दलीय सहित 41 विधायकों के समर्थन का दावा किया था और उन्हें राज्यपाल के सामने पेश भी किया था. 81 सदस्यों की विधानसभा में बहुमत के लिए 41 विधायकों की ज़रूरत है. एनडीए ने इन विधायकों को गुरुवार को राष्ट्रपति के सामने भी पेश कर दिया था. दूसरी ओर शिबु सोरेन ने भी 42 विधायकों के समर्थन का दावा किया है. |
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